मक्का की खेती, उत्पादन और व्यापार में पूर्णिया सब से आगे,

20 अरब के पार, आस्ट्रेलिया, लंदन तक मांग

 

मक्का की खेती

मक्का की खेती

मक्का की खेती में पुर्णिया प्रमंडल बिहार के अन्य जिलों से आगे है ! यहां के किसान मक्का की खेती पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ! एक समय था जब यहां के किसानों मेन इनकम जुट से था  लेकिन अब उसका स्थान मक्के ने ले लिया है ! सीमांचल क्षेत्र में मक्के की पैदावार काफी अच्छा हो रहा है जिससे किसानों के आर्थिक हालात में सुधार हो रहा है !

उत्पादन और व्यापार में पूर्णिया सब से आग

कोसी व पूर्णिया में हर साल 16.24 लाख मीट्रिक टन मक्के का उत्पादन हो रहा है जिसमें हर साल रेल और सड़क मार्ग से 14 लाख मीट्रिक टन मक्का बाहर जा रहा है। प्रति वर्ष मक्के का कारोबार करीब 20 अरब को पार भी कर गया है ! उत्तर बिहार की सबसे बड़ा मक्का मंडी गुलाबबाग बन गया है !

सीमानचल का मक्का क्वालिटी सर्वोत्तम

फ्रांस, आस्ट्रेलिया, लंदन, जापान आदि देशों में सीमानचली मक्के की मांग हो रहा है ! यहां के मक्का की क्वालिटी काफी अच्छी है क्योंकि यहां का जमीनों तासीर अलग है! ड्रायर हाउस खुल जाने से मक्का अंतरराष्ट्रीय स्तर का उत्पादन हो रहा है ! दक्षिण भारत में भी सीमानचली मक्के की चर्चा हो रहा है  !

मक्का से किया बनता है ?

मक्का की खेती

  • विभिन्न प्रकार खाने की सामग्री
  • ग्लुकोज
  • दवा
  • फीड
  • फूड प्रोडक्ट

मक्का उत्पादक किसान बदहाल

1400 रुपये प्रति क्विंटल या इस से कम, मक्के का दाम किसानों को मिल रहा है, कंपनियां व  ट्रेडर करोड़ों-अरबों कमा रहे! यानि एक किलो मक्के की कीमत सिर्फ 14 रूपया है जबकि 100 ग्राम मक्का से बना पॉपकॉर्न कि कीमत 100 रूपये से ज्यादा माल में ! किसानों को उचित मूल्य नही मिल रहा है !

बाढ़ ग्रस्त सीमानचल क्षेत्र किसानों का उम्मीद सिर्फ मक्के से है क्योंकि हर साल बाढ़ धान की खेती को खराब कर देता है या उचित मात्रा में बारिश नही होती है !

 

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