खूनी रविवार क्या है आंसर

About Author: M. S. Nashtarkk

Last Edited: 16 Nov 2019 12:49 AM

खूनी रविवार की जानकारी

खूनी रविवार क्या है

खूनी रविवार क्या है, पूरी बात जानना चाहते हैं तो कृपया अंत तक जरूर पढ़ें! खूनी रविवार का इतिहास का ताल्लुक रूस के राजधानी सेंट पीटर्सबर्ग है, जो 22 जनवरी, 1905 को घटित हुआ था. वह दिन रविवार था. इसीलिए इसे खूनी रविवार कहते हैं ! Khuni Ravivar Ki Ghatna In Hindi Ko पूरा जानते हैं. 

खूनी रविवार के दिन क्या हुआ था

श्रमिकों के शांतिपूर्ण जुलूस पर रशियन सैनिकों ने गोलियाँ चलायीं थी. जिस के कारण सैकड़ों प्रदर्शनकारी मारे गये और हजारों की संख्या में घायल हुए थे !

फादर गेपन ने श्रमिकों आर्थिक समस्याओं को जार सरकार के बातचीत से सुलझाना चाहते थे लेकिन वार्ता विफल हो गई ! श्रमिकों के विभिन्न वर्ग ने फैसला लिया हम लोग शांतिपूर्ण ढंग से सरकार के खिलाफ हड़ताल करेंगे !

हड़ताली श्रमिकों ने एक बड़ा जुलूस निकाला जिससे पूरा सेंट पीटर्सबर्ग, आंदोलनकारियों से भर चुका था ! धीरे धीरे धीरे राजा के महल के तरफ बढ़ना शुरू हो गया था !

जार सरकार के सैनिकों ने निहत्था श्रमिकों पर गोलियाँ की बारिश कर दिया जिससे महल के सामने का मैदान पूरी तरह खून से लबालब हो गया था ! बचे हजारों प्रदर्शनकारियों को सलाखों के बीच में धकेल दिया गया. 

यह दर्दनाक घटना पूरे विश्व में प्रसिद्ध हुआ था. वह दिन रविवार का था, इसीलिए इतिहासकारों ने इस क्रांति को खूनी रविवार कहते हैं !

खूनी रविवार में कितने लोगों की मौत हुई थी

कितने प्रदर्शनकारियों को मारा गया, यह संख्या अनिश्चित है. ज़ार के अधिकारियों ने अनुसार, 96 मृत और 333 घायल बताया गया था. सरकार विरोधी स्रोतों ने 4,000 से अधिक मृतकों का दावा किया था. ज़ार के अधिकारियों द्वारा कई हताहतों को गुप्त रूप से दफनाया गया दिया गया था.

इस घटना का प्रभाव

ज़ार को कभी "लिटिल फादर" के रूप में देखा जाता था. इस घटना के बाद लगभग सब कुछ बदल चुका था. उनके निरंकुश शासन के प्रति कटुता बढ़ गई. एक व्यापक रूप से उद्धृत प्रतिक्रिया थी "हमारे पास अब ज़ार नहीं है".

इस घटना को ब्रिटिश राजदूत ने रूस में क्रांतिकारी गतिविधियों को बढ़ावा देने और 1905 की क्रांति में योगदान के रूप में देखा था. ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका में मीडिया कमेंटरी पहले से ही अलोकप्रिय शासन के कार्यों के प्रति अत्यधिक नकारात्मक थी.