Business & Finance In Hindi - फाइनेंस व व्यापार और बिजनेस क्या है

By: Aleena Farheen Last Edited: 15 Feb 2019 02:21 PM

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फाइनेंस क्या है

Finance In Hindi शब्दों के जरिए आप फाइनेंस को विस्तार से जानना चाहते हैं ? आप अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं ? बिजनेस के लिए पूंजी कैसे बनाया जाए ? आज के समय सबसे अच्छा इन्वेस्टमेंट कौन सा है ? 

इस लेख में फाइनेंस से संबंधित अनेक प्रकार की उपयोगी जानकारी आपको मिलने वाला है ! यह लेख आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है ! कृपया इस लेख को ध्यान से अंत तक पढ़ें !

फाइनेंस की जानकारी क्यों आवश्यक है

क्या आपको कम ब्याज दर में ऋण प्राप्त करना है ? अपने निवेश से ज्यादा रिटर्न की उम्मीद कर रहे हैं ? बिजनेस के लिए धन इकट्ठा करना चाहते हैं ? इन सब सवालों का जवाब एक है वह है, फाइनेंस !

फाइनेंस किसे कहते हैं

दोस्तों, आप जानते हैं कि दुनिया का कोई भी क्रिया बिना उर्जा का नहीं चल सकता है ! उसी प्रकार कोई भी व्यक्ति, व्यापारिक संस्थान या सरकार बिना धन या फण्ड नहीं चल सकता है ! 

फाइनेंस की परिभाषा क्या है

फाइनेंस (Finance) को हिंदी में वित्त कहते हैं, जिस में वित्तीय प्रबंधन का अध्ययन किया जाता है उसे फाइनेंस कहते हैं ! वित्त एक ऐसा क्षेत्र है जो निवेश के अध्ययन से संबंधित है । आधुनिक फाइनेंस बहुत सारे वाणिज्यिक कार्यविधियों का एक सम्पूर्ण समूह की तरह काम करता है !

‘’ फाइनेंस (वित्त) धन के प्रबंधन का विज्ञान है जिसमें निवेश, नकदी प्रवाह और जरूरी वित्त संसाधन प्राप्त करने की वास्तविक प्रक्रिया है’’

बिजनेस क्या है

बिजनेस एक अंग्रेजी शब्द है इसको हिंदी में धंधा, कारोबार या उद्द्य्म भी कहते हैं ! एक संस्था (कम्पनी, इंटरप्राइज या फर्म) या आर्थिक प्रणाली जहाँ पर उत्पादों एवं सेवाओं का निर्माण नक़दी(धन) के लिए किया जाता हो उसे बिजनेस कहते हैं !

पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में बिजनेस, निजी हाथ में होता है ! जैसे मुकेश अंबानी मोबाइल नेटवर्क का सेवा प्रदान करता है उसके कंपनी का नाम जियो रिलायंस है ! टाटा नमक का उत्पाद लोगों को बेचते हैं !

एक आदमी अपने कंपनी के जरिए उत्पादों एवं सेवाओं का निर्माण करता है और उसे मुनाफे के लिए उपभोक्ताओं को बेचते हैं !

बिजनेस और व्यापार कैसे अलग है

कोई दुकानदार जियो रिलायंस के सेवा (सिम) उपभोक्ता को बेचते हैं या कोई दुकानदार नमक जैसे उत्पाद को एक स्थान से खरीद कर दूसरे स्थान के उपभोक्ता को बेचते हैं ! यहाँ पर दुकानदार व्यापारी है जबकि मुकेश अंबानी बिजनेसमैन है !

व्यापार की परिभाषा क्या है

व्यापार (तिजारत) को अंग्रेजी में Trade कहते हैं, जिनमें कोई व्यक्ति या संस्था निर्माण स्थान से सेवाओं एवं उत्पादों को खरीद कर दूसरे स्थान के उपभोक्ताओं को फायदे के लिए बेचता हो, उसे व्यापार कहते हैं ! इस क्रिया को करने वाले को व्यापारी कहते हैं !

बिजनेस एवं व्यापार के लिए फाइनेंस की जानकारी आवश्यक है

अब आपको बिजनेस और व्यापार में अंतर समझ में आ गया होगा ! दोनों ही काम को करने के लिए धन की आवश्यकता होती है ! धन का उचित प्रबंधन यह हमें अर्थशास्त्र (फाइनेंसियल मैनेजमेंट) सिखाता है !

फाइनेंस के कितने प्रकार होते हैं

आधुनिक युग में, फाइनेंस को तीन भागों में विभाजित किया गया है  -

  1. व्यक्तिगत वित्त (पर्सनल फाइनेन्स)
  2. निगम वित्त (कॉरपोरेट फाइनेन्स)
  3. लोक वित्त (पब्लिक फाइनेन्स)

Personal Finance in Hindi

पर्सनल फाइनेन्स को हिंदी में व्यक्तिगत वित्त या निजी वित्त कहते हैं ! यह एक प्रकार का वित्तीय प्रबन्धन हैं जिसमें कोई व्यक्ति या परिवार अपने लिए बजट बनाता है !

वित्तीय जोखिमों और भावी जीवन के वित्तीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर धन को इकट्ठा करने से लेकर खर्च व बचत का व्यापक प्रबंधन करना शामिल है !

क्या हमें अपना पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट करना चाहिए ?

हम भारतीय इस टॉपिक पर कम ही ध्यान देते हैं ! इसी कारण अचानक मृत्यु से पूरा फैमिली बिखर जाता है या बुढ़ापे की जिंदगी में पाई-पाई के लिए लोग परेशान रहते हैं ! अचानक नौकरी चला जाए तो भी लोग रोड पर आ जाते हैं !

कभी सोचा है ऐसा सिर्फ हमारे साथ ही होता है और देशों के लोगों का क्या हाल है ? कभी बिजनेस करना चाहा तो उसके लिए कभी पूंजी इकट्ठा नहीं कर पाया ! बिजनेस शुरू कर दिया लेकिन पूंजी की कमी के कारण बिजनेस फेल हो जाता है !

दोस्तों, दुनिया के अमीर देशों जैसे अमेरिका व इंग्लैंड में ऐसा कम ही होता है ! वहां के लोग पर्सनल फाइनेंसियल प्लानिंग करते हैं, यही नहीं विशेषज्ञ से राय भी लेते हैं !

पर्सनल फाइनेंसियल प्लानिंग कैसे करें

व्यक्तिगत फाइनेंस का मुख्य घटक पर्सनल फाइनेंसियल प्लानिंग है, जो समय के साथ बदलता है ! हमें उसपर नियमित निगरानी और पुनः मूल्यांकन की आवश्यकता होती है !

पहला - आकलन

हमें पता होता है कि हमारी इनकम क्या है और आने वाले सालों में कैसा रहेगा ! भविष्य में और कितने खर्चे होंगे, इसका ज्यादा पता नहीं होता है ! भविष्य में होने वाले खर्च आकलन कर सकते हैं !

हमारे ऊपर कितना कर्ज है और हमने दूसरों को कितना कर्ज दिया है ! हमारे पास जो प्रॉपर्टी है उसका कीमत कितना प्रतिशत बढ़ रहा है !

क्या महंगाई दर से कम प्रतिशत में तो नहीं बढ़ रहा है !  अगर हमारी प्रॉपर्टी का ग्रोथ रेट, महंगाई दर से कम है तो इसका मतलब यह हुआ कि हम गरीब हो रहे हैं !

कॉपी कलम निकालिए और इसे लिखिए

  • हमारी आय - अभी और आने वाले सालों में
  • ऋण - हमने किसी को दिया है या हमारे ऊपर कितना है
  • व्यय - तत्काल खर्च और भविष्य में होने वाले खर्च.

दूसरा - टारगेट सेट कीजिए

हमें अपने लिए फिनांसिअल टारगेट तय करना चाहिए, तत्कालिक एवं दीर्घकालिक टारगेट को हमें लिखना चाहिए ! अपने जिंदगी के उम्र के हिसाब से भी हर 5 वर्षों एवं 10 वर्षों का टारगेट हमें तय करना चाहिए ! 

अगर आप ने 25 वर्ष में काम करना शुरू किया और लगातार 10 वर्षों तक इन्वेस्ट किया ! शुरूआती इन्वेस्टमेंट आपको फिनांशल सिक्योरिटी देने के साथ-साथ आपके इनकम को भी बढ़ा देता है !

तीसरा - प्लान बनाइए

जिंदगी में अगर आपको सुखी रहना चाहते हैं, तो इस बात को कभी भी नहीं भूलिएगा ! अपने खर्चे को कभी भी अपने इनकम से बढ़ने मत दीजिए ! अगर आपके खर्चे बढ़ रहे हैं तो इनकम बढ़ाने का तरीके को खोजिए, कर्ज में मत जाइए !

महीने और साल में आपका कितना बचत होता है और आप उस बचत का क्या करते हैं ? अगर बचत नहीं हो पाता है तो उसके कारण को ढूंढिए और उसका जल्दी से निपटारा कीजिए !

पहले बचत इनकम को शॉर्ट टर्म में इन्वेस्ट करें ! जब वह राशि बड़ा हो जाए तो उसे लॉन्ग टर्म में इन्वेस्ट कर दें ! शॉर्ट टर्म में इन्वेस्ट में शेयर मार्केट, म्यूच्यूअल फंड, एवं फिक्स डिपोजिट आदि अच्छे ऑप्शन हैं !

लॉन्ग टर्म में इन्वेस्ट में शहरी क्षेत्र में प्रॉपर्टी खरीदना बेहतर माना जाता है, क्योंकि दाम बढ़ने के साथ-साथ उस से किराया भी आता है !

चौथा - निष्पादन (लागू करना)

पर्सनल वित्तीय योजना के निष्पादन में अक्सर अनुशासन और दृढ़ता की आवश्यकता होती है । कई लोग पेशेवरों जैसे लेखाकार, वित्तीय योजनाकार, निवेश सलाहकार और वकील से सहायता प्राप्त करते हैं !

पांचवा - मॉनिटरिंग और पुनर्मूल्यांकन

जैसे-जैसे समय बीतता है उसके अनुसार मार्केट भी बदलता है एवं सरकार की नीतियों में भी बदलाव आता है ! जैसे गांव की प्रॉपर्टी के रेट उतना ज्यादा नहीं बढ़ रहा है जितना कि शहर के प्रॉपर्टी का रेट बढ़ रहा है !

समय बीतने के साथ आपके भविष्य में होने वाले खर्चे में भी बदलाव होने के बहुत चांसेस होते हैं ! आप के पैरेंटल प्रॉपर्टी भी आपके हाथ में आने लगते हैं !

आपको साल में कम से कम एक बार पूरा आकलन करना चाहिए उसके साथ फाइनेंस के एक्सपर्ट के साथ सलाह मशवरा भी करना चाहिए !

फाइनेंस के कुछ बातें जो हमें कभी नहीं भूलना चाहिए

पहला - जिंदगी एवं परिवार के लिए जरूरी 5 चीजें

हमारी जिंदगी का पांच जरूरी चीजें

  1. रोटी
  2. कपड़ा
  3. मकान
  4. स्वास्थ्य
  5. शिक्षा

क्या हमें पूरी जिंदगी यह 5 चीजें मिलता रहेगा ? क्या मेरे मृत्यु के बाद मेरे परिवार को भी यह 5 चीजें मिलता रहेगा ?

दूसरा - फ़ाइनेंशियल सिक्योरिटी

हम भारतीयों की जिंदगी जवानी बड़ी मौज से कटता है लेकिन बुढ़ापा आते ही सब बदल जाता है ! नौकरी छूट जाए या असमय मृत्यु हो जाए तो ऐसे में भी हमारा परिवार बिखर जाता है !

ओल्ड एज लोगों के पास घर या प्रॉपर्टी होता है जिसे वह बेच नहीं सकता क्योंकि उन पर बच्चों का दबाव होता है ! अगर उसको कोई गंभीर बीमारी हो जाए या उसे खर्च के लिए बच्चों ने पैसे देना बंद कर दिया हो तो जरा सोचिए उनकी जिंदगी का क्या हकीकत होगा !

अगर आप इस परेशानी से बचना चाहते हैं तो हमेशा थोड़ा-थोड़ा इन्वेस्ट जरूर करें ! आपके इन्वेस्टमेंट सॉलिड फॉर्म (घर)के साथ-साथ लिक्विड फॉर्म का भी होना चाहिए !

लिक्विड फॉर्म वह इन्वेस्टमेंट किया होता है ? जिसको आप बैंकिंग सेक्टर में रखते हैं, जिसके बारे में सिर्फ आपको पता होता है ! इस से पैसे निकालना बहुत ही आसान होता है और किसी को पता भी नहीं चलता है ! पेंशन प्लान, इंश्योरेंस, शेयर मार्केट व म्यूच्यूअल फंड आदि लिक्विड फॉर्म इन्वेस्टमेंट का बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है !

काला धन रोकने के लिए सरकार ने नोटबंदी का कानून ले आया था जिससे कैश कि काफी किल्लत हो गई थी ! सुना होगा पहले के जमाने में कोई लुटेरा या राजा पूरे गांव व शहर को जला देता थे !

उस समय भी लोग इस समस्या का समाधान निकाल लेते थे  ! लोग उस समय भी सोना को जमीन के नीचे गाढ़ कर अपने बच्चों के लिए रख देता था ! इस तरह के समस्याओं का भी निदान आपको सकते हैं !

क्रिप्टो करेंसी जैसे बिटकॉइन से शुरुआती दिनों में काफी पैसे कमाया था ! क्रिप्टो करेंसी पर सरकार का किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं होता है !

भारत के मौजूदा कानून के अनुसार, आप के बैंक खातों में सिर्फ ₹100000 ही सुरक्षित है ! बैंक अगर डूब जाती है तो सरकार आपको ₹100000 वापस करेगा !

टर्म इंश्योरेंस के जरिए आप अपने परिवार को सुरक्षित कर सकते हैं ! आज के समय मार्केट में हर प्रकार का इंश्योरेंस उपलब्ध है यह कह सकते हैं कि मोबाइल फोन से लेकर अपने बिजनेस तक का भी इंश्योरेंस करा सकते हैं !

तीसरा - कमाई, बचत व इन्वेस्टमेंट

हमेशा अपनी कमाई को बढ़ाने के तरीके को खोजिए ! एक नौकरी पर कभी पूरी तरह निर्भर मत हो जाइए ! आपने सुना होगा पैसा ही पैसा कमाता है!

बचत की आदत को अपनाइए, विभिन्न प्रकार की कंपनियाँ आपको बहुत सारे बेहतरीन ऑफर देते हैं ! ऑफर को देखकर आप वह उत्पाद को खरीद लेते हैं !

अगर आपके रिलेटिव ने एक नई कार खरीद लिया तो आप भी दबाव में आ जाते ! कर्ज लेकर ऐसे शौक को पूरा मत कीजिए ! क्योंकि कार का कीमत हर दिन घटेगा जबकि प्रॉपर्टी का कीमत हर दिन बढ़ता है !

सही जगह इन्वेस्टमेंट कीजिए, आज के समय अपने देश में बहुत तरह के इन्वेस्टमेंट के तरीके आ गए हैं  ! उन सब की जानकारी को हासिल कीजिए उन मैं आपका फायदा छुपा हुआ है ! हमेशा एक चीजों पर पैसा मत लगाइए !

चौथा - टैक्स

नौकरी पेशा करने वाले को टैक्स के बारे में ज्यादा सोचने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि उसका ऑटोमेटिक सिस्टम होता है ! उसका टैक्स सैलरी अकाउंट से कट जाता है ! लेकिन आप टैक्स बचाने के उपाय पर काम कर सकते हैं !

छोटे-छोटे व्यापारी एवं बिजनेसमैन अक्सर टैक्स के उलझन में फंस जाते हैं ! एक बात याद रखें कि अगर आप टैक्स सरकार को किसी कारण नहीं दे पा रहे हैं तो वह भारत में अपराध की श्रेणी में आता है !

अगर आप टैक्स एडवाइजर की राय के साथ बिजनेस या व्यापार करें तो आपको कभी भी टैक्स का झंझट नहीं होगा ! एडवांस टैक्स एक अच्छा विकल्प है अगर आप देते हैं तो आपको इसमें काफी छूट मिलने के चांसेस होते हैं !

Corporate / Company Finance in Hindi

कॉरपोरेट फाइनेन्स को हिंदी में निगम वित्त कहते हैं जो कम्पनियों की फण्डिंग व पूंजी संरचना व्यापक प्रबंधन है !

Public Finance in Hindi

पब्लिक फाइनेन्स को हिंदी में लोक वित्त कहते हैं जो सरकार के आय व खर्च का आकलन और प्रबंधन करती है !

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