Business & Finance In Hindi - फाइनेंस व व्यापार और बिजनेस क्या है

About Author: Aleena Farheen

Last Edited: 31 Jul 2019 12:31 AM

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सही मायने में फाइनेंस क्या है

फाइनेंस क्या है ? आपने ना जाने कितने बार गूगल पर Finance In Hindi जैसे शब्दों को सर्च किया होगा. लेकिन आज भी फाइनेंस का सर्च जारी है. आशा करती हूं कि इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको कहीं और जाने की आवश्यकता नहीं होगा. 

  • क्या आप एक नया बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं ? 
  • नए व्यवसाय के लिए पूंजी की आवश्यकता है ? 
  • क्या आप इन्वेस्ट से संबंधित फाइनेंशियल सिस्टम की जानकारी चाहते हैं ? 
  • क्या वाकई आप ज्ञान बढ़ाना चाहते हैं ? 

इस लेख में आपको वित्तीय संबंधी A To Z जानकारी मिलने वाला है जिसकी आपने कभी कल्पना नहीं किया होगा. धैर्य रखकर इस लेख को आखिर तक पढ़ लें, जिसका फायदा आपको संपूर्ण जीवन में होगा. 

सब से पहले, फाइनेंस की जानकारी आप के लिए क्यों आवश्यक है

वित्तीय प्रबंधन के किये बिना, आपके बिज़नेस को पूरी तरह फेल कर सकता है. यही नहीं अगर आप एक इन्वेस्टर हैं, आपके इन्वेस्ट को पूरी तरह डूब आ सकता है.

जैसा कि आप जानते हैं दुनिया का कोई भी कार्य बिना ऊर्जा के संभव नहीं है. उसी प्रकार फाइनेंस की जानकारी के बिना कोई भी बिजनेस या इन्वेस्टमेंट नहीं किया जा सकता है. 

अक्सर लोग इस बात के लिए परेशान रहते हैं कि हमें सस्ते दर पर ऋण कहां से प्राप्त होगा. हमें किस प्रकार के निवेश से ज्यादा रिटर्न हो सकता है.

अपना बिजनेस शुरू करने के लिए धन को इकट्ठा कैसे करें. इन सब चीजों के लिए आपको फाइनेंस की जानकारी अति आवश्यक है. 

फाइनेंस किसे कहते हैं

कोई भी व्यक्ति या व्यापारिक संस्था यहां तक की हमारी सरकार बिना धन के नहीं चलाया जा सकता है. इकोनॉमिक्स की दुनिया में धन किसे कहा जाता है. धन को अंग्रेजी भाषा में Fund कहा जाता है. 

धन शब्द को इकोनॉमिक्स में निधि, पूंजी एवं रकम शब्दों से जोड़कर देखा जाता है. हमें ध्यान पूर्वक इन शब्दों को अच्छे से समझना चाहिए. आइए की परिभाषा को देखते हैं. 

फाइनेंस की परिभाषा क्या है

फाइनेंस शब्द का ओरिजिन फ्रेंच भाषा से 18 वीं सदी में हुआ था. जिसका मतलब होता है रुपयों का प्रबंधन. Finance को हिंदी भाषा में वित्त कहा जाता है. वित्त का अध्ययन अर्थशास्त्र विषय में क्या जाता है. 

फाइनेंस शब्द को अगर किसी एक शब्द में परिभाषित करना हो तो इसे हम एक्सचेंज कर सकते हैं. जी हां है ना उसमें एक्सचेंज ही होता है. कोई संस्था या व्यक्ति, सर्विस या वस्तु के बदले धन देता है. 

मॉडर्न फाइनेंशियल सिस्टम में कई अध्याय को जोड़कर बनाया गया है. जिसमें वित्तीय प्रबंधन के अलावा निवेश, लोन, इन्वेस्टमेंट और बजट को भी शामिल किया गया है. 

‘’ वित्त को धन के प्रबंधन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसमें धन के निवेश, लोन, बचत और बजट से संबंधित गतिविधियों का पूर्व अनुमान किया जाता है. ‘’

‘’अर्थशास्त्र के अनुसार, वित्त को धन प्रबंधन का विज्ञान कहा जाता है जिसमें निवेश के साथ नदी की प्रवाह एवं जरूरी वित्तीय संसाधन प्राप्त करने हेतु एक वास्तविक प्रक्रिया माना गया है.‘’

‘’साधारण परिभाषा में, वित्त को मनी का मैनेजमेंट कहा जाता है, या उसे भी कहा जा सकता है जो कैश में कन्वर्ट हो सकता हो. ‘’

बिजनेस व व्यापार के लिए फाइनेंस की जानकारी क्यों आवश्यक है

आज के समय दुनिया फाइनेंस बिना कुछ भी कल्पना नहीं कर सकता है. फाइनेंस को ही अर्थव्यवस्था की आत्मा कहा जाता है.  

चाहे आप एक परिवार या व्यापार वह बिज़नेस शुरू करते हैं. इस को सुचारू रूप से चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है. धन के बिना इसे चलाया नहीं जा सकता है. 

धन की आवश्यकता चाहे बिजनेस हो या व्यापार को एक जैसा हमेशा नहीं होता है. यह समझना आवश्यक है कि हमें धन की आवश्यकता अत्यधिक कब होगी और सबसे कम कब होगी. 

जब धन की आवश्यकता सबसे ज्यादा होती है तो हमारे पास क्या विकल्प हो सकते हैं ? क्या हमें पहले से इन्वेस्टमेंट करना चाहिए या फिर हमें मार्केट से तुरंत लोन लेना चाहिए. 

जब हमें धन की आवश्यकता कम होती है तो क्या उस समय हमें इन्वेस्टमेंट करना चाहिए. इन्वेस्टमेंट शॉर्ट टर्म एवं लोंग टर्म भी हो सकता है. 

यह बात पढ़ने में आपको बहुत छोटा सा लगता होगा. लेकिन 90 फ़ीसदी बिजनेस इसी कैलकुलेटर को नहीं कर पाने में विफल हो जाते हैं. जिसके कारण कंपनी उसके घाटे में जाता है और उसका मालिक दिवालिया भी हो सकता है. धन का उचित प्रबंधन यह हमें अर्थशास्त्र (फाइनेंसियल मैनेजमेंट) सिखाता है !

फाइनेंस के कितने प्रकार होते हैं

आधुनिक युग में, फाइनेंस को तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है - 

  1. व्यक्तिगत वित्त (पर्सनल फाइनेन्स)
  2. निगम वित्त (कॉरपोरेट फाइनेन्स)
  3. लोक वित्त (पब्लिक फाइनेन्स)

Personal Finance In Hindi

पर्सनल फाइनेंस इन हिंदी शब्दों को आपने कई बार खोजा होगा.  लेकिन कुछ बैंकिंग वेबसाइट अपने आप को उलझा कर रख दिया होगा. मैं आपको पूरी ईमानदारी के साथ परसनल फाइनेंसियल मैनेजमेंट को समझाना चाहती हूं. 

पर्सनल फाइनेंस को हिंदी भाषा में व्यक्तिगत यानी निजी वित्त कहते हैं. जिसमें कोई व्यक्ति या परिवार अपने लिए बजट बनाता हो,  इन्वेस्टमेंट की प्लानिंग करता हो, या अपने सुखद रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करता हो, या अपने बच्चे के उच्च शिक्षा के लिए इन्वेस्टमेंट करता हों. इनमें सभी को मिलाकर या किसी एक को भी हम पर्सनल फाइनेंस कह सकते हैं. 

पर्सनल फाइनेंस की सूची में व्यक्तिगत खर्चों से लेकर परिवारिक खर्चों के प्रबंधन को भी शामिल किया जा सकता है. व्यक्तिगत या पारिवारिक आय के सभी स्रोतों जोड़ कर ही धन की उगाही की जाती है. उगाई की गई धन से आप कितना खर्च करते हैं ? खर्च के अनुसार ही आपका बचत होता है. 

  • बचत = आय - खर्च

बचत की गई ही रकम आपको वित्तीय जोखिमों एवं जीवन में आने वाले वित्तीय आवश्यकताओं सुरक्षा प्रदान करता है. 

आपको लगता है कि हमने ज्यादा बचत कर लिया है तो हमारी वित्तीय सुरक्षा बढ़ चुकी है. ऐसा जरूरी नहीं है ? ज्यादातर लोग इसी पॉइंट पर गलती कर देते हैं. 

अगर आप बचत की गई रकम को सही जगह पर इन्वेस्ट करते हैं और आपको ज्यादा रिटर्न मिलता है तभी आपकी वित्तीय सुरक्षा बढ़ती है. आपने इन्फ्लेशन रेट के बारे में सुना होगा. भारतीय अर्थव्यवस्था में इन्फ्लेशन रेट 9 फ़ीसदी से ऊपर होता है. 

आपने बचत की गई रकम को फिक्स डिपॉजिट कर दिया. वहां से आपको रिटर्न 6 से 7 फ़ीसदी की दर मिला. क्या आप सुरक्षित हैं ? आप बिल्कुल सुरक्षित नहीं है. क्योंकि इन्फ्लेशन रेट 9 फ़ीसदी से ऊपर है. आपका रिटर्न मात्र 7% है. आप यकीनन गरीब हो रहे हैं. 

क्या हमें अपना पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट करना चाहिए ?

हमारी सभ्यता ऐसी है कि हम लोग रुपया पैसा के बारे में ज्यादा किसी से डिस्कस नहीं कर सकते हैं. हमारी समाज ऐसे लोगों को लालची इंसान कहते हैं. किसी परिवार के मुखिया का अचानक मृत्यु हो जाए तो परिवार बिखर जाता है.  अपने भी उसे छोड़ जाते हैं. 

समाज में देखा होगा कि बुरे बुजुर्ग लोग एक एक रुपए के लिए कितने परेशान होते हैं. एक दिन आपको भी इसी प्लेटफार्म पर खड़ा होना है. क्या आपने इसके लिए कोई तैयारी की है ? 

दुनिया के विकसित देशों में, ज्यादातर लोग पैसे खर्च करके फाइनेंसियल एडवाइजर से राय लेते हैं. हम लोग के साथ विडंबना यह है कि हम फ्री में भी राय लेना पसंद नहीं करते हैं. आइए आगे बात करते हैं कि हम फाइनेंसियल प्लानिंग कैसे करें. 

पर्सनल फाइनेंसियल प्लानिंग कैसे करें

मैंने आपके आसानी के लिए, फाइनेंसियल प्लानिंग को कई चरणों में बांटा है. एक बात ज़रूर याद रखिएगा की कोई भी प्लानिंग समय एवं आवश्यकताओं के अनुसार बदलता है. नीचे लिखे गए चरणों में आप जो भी पढ़ेंगे, उसे आपको समय-समय पर आकलन करने की आवश्यकता होगी. 

प्रथम चरण में आकलन करें

आप अगर मौसम का पूर्व अनुमान लगा लेते हैं तो आप बारिश में भीगने से बस जाते हैं. यहां पर भी कुछ ऐसा ही करना होता है. 

हमें अच्छे से पता होना चाहिए कि सभी स्रोतों से हमारी सही इनकम वर्तमान में क्या है और आने वाले 5 या 10 वर्षों में कैसा रहेगा. 

वर्तमान समय में हमारी और परिवार के कुल खर्च कितने हैं. क्या खर्च में कुछ कटौती मुमकिन है ? आने वाले साल में कौन-कौन से बड़े खर्च होंगे. बच्चों का हायर एजुकेशन व शादी को भी शामिल करना ना भूलें. इन सब से भी सबसे ज्यादा आवश्यक है रिटायर करने के बाद आपके पास कितना धन होगा ? 

हम पर या हमारे परिवार पर कुल कितने प्रकार के कर्ज हैं ?  अगर नहीं है तो बहुत अच्छी बात है. हमने अब तक कितना इन्वेस्टमेंट कहां पर किया है ?  क्या उन पर रिटर्न 10 फ़ीसदी से ज़्यादा है ? 

कॉपी कलम निकालकर इसको सही से कैलकुलेटर कर कर देखिए. उसी अनुरूप आप टारगेट सेट कीजिए. 

दूसरा चरण - आने वाले वर्षों के लिए प्लान इन कीजिए

प्लानिंग में सबसे पहले फाइनेंसियल टारगेट को सेट कीजिए. जैसे बाद में बल्लेबाजी करने वाले क्रिकेट टीम के बल्लेबाज को एक टारगेट मिलता है. उसके बाद ही आप प्लानिंग करें. 

सबसे पहले इनकम को बढ़ाने के सभी छोटे-बड़े तरीकों को अपनाएं. उसके साथ खर्च को कम करने के मुमकिन सभी तरीकों को अपना लें. तभी आपका बचत ज्यादा होगा. 

बचत को पहले शॉर्ट टर्म में इन्वेस्ट कीजिए. जब एक 2 साल में कोई मोटा रकम जमा हो जाए तो उसे लॉन्गटन में इन्वेस्ट कीजिए. 

शॉर्ट टर्म में इन्वेस्ट करने के लिए शुरुआत अपने घर से करें. जैसे कि आपको अपने घर का राशन खरीदना है, जो सामान खराब नहीं हो सकता है सीजन पर उसे पूरे 1 साल के लिए खरीद लें. या आपका जरूरत से ज्यादा हो जाए तो उसे बेच भी सकते हैं. 

हर महीने अगर बचत हो तो फिक्स डिपॉजिट कर दें. जब आपका यह छोटा छोटा इन्वेस्टमेंट बड़ा हो जाए तो उसे आप लोंग टर्म में इन्वेस्ट कर दें. 

ज्यादातर लोग शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट नहीं कर पाते हैं जिसके कारण वह कोई एलआईसी या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर देते हैं. इससे भी ज्यादा कुछ महारथी लोग होते हैं वह शेयर मार्केट में इन्वेस्ट कर देते हैं. जिस को सही माने में इसकी जानकारी है वह अच्छा रिटर्न हासिल भी कर लेते हैं लेकिन ज्यादातर लोग फेल हो जाते हैं. 

तीसरा चरण - हर साल मूल्यांकन करें

जैसे आप कुछ अनोखे काम के लिए दोस्त बनाते हैं. उसी प्रकार आप एक ग्रुप बनाइए. इसमें सब लोग खुले मन से इस तरह के डिस्कशन करते हैं. तभी आपको पता चलेगा कि आप कितने सही रास्ते पर जा रहे हैं. 

आपका निवेश कितना सही है. आपको तभी पता चलेगा जब आप दूसरे के साथ तुलना कर पाएंगे. 

चौथा चरण - एक्सपर्ट की राय लें

दुनिया में हर एक फील्ड के अलग-अलग एक्सपर्ट होते हैं. आप के आस पास बहुत सारे फिनानशियल एक्सपोर्ट होते हैं. उनको कुछ पैसे देकर राय मशवरा ज़रुर लें. 

पांचवा चरण - अपने आप पर भरोसा करें और अपनी प्रॉपर्टी की सुरक्षा स्वयं करें

कुछ लोग ज्यादा आशा करते हैं कि हमें अपने पैरंट्स या बड़े भाई से कुछ प्रॉपर्टी मिल जाएगा जो हमारे भविष्य के लिए संजीवनी हो सकता है. अगर आपको पैरेंटल प्रॉपर्टी मिल जाता है तो बहुत अच्छी बात है लेकिन आंख मूंदकर उस पर आप भरोसा नहीं कर सकते हैं. 

कुछ लोग अपने बिज़नेस या प्रॉपर्टी की सुरक्षा करने के लिए अपने किसी रिश्तेदार या दोस्त पर जरूरत से ज्यादा भरोसा कर लेते हैं. आप के लिए यह एक खतरनाक डील भी हो सकता है. अपने प्रॉपर्टी की सुरक्षा स्वयं करें. 

फाइनेंस के कुछ बातें जो हमें कभी नहीं भूलना चाहिए

दोस्तों यहां तक आपको फाइनेंस का काफी ज्ञान हो चुका होगा. लेकिन ज्ञान होने के बावजूद भी हम कुछ तथ्यों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं. कृपया 3 तथ्यों को भी ज़रूर पढ़ लें. 

पहला - जीवन के बुनियादी सुविधाओं को फाइनेंसियल सिस्टम में रखें

यह एक कड़वा प्रश्न है. क्या आप जब तक जीवित रहेंगे आपको रोटी, कपड़ा और मकान मिलता रहेगा ? उसके साथ आपको जीवन भर स्वास्थ सेवा लेने के लिए पर्याप्त धन हैं ? क्या आपको अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त धन है ? मेरे हिसाब से आपको इन पांच बातों को कभी नहीं भूलना चाहिए ? 

ठीक है यह 5 चीजें आपके जिंदगी में आपको और आपके परिवार को मिलता रहेगा. क्या आप के मृत्यु के बाद भी यह 5 चीजें आपके बचे हुए परिवार के सदस्यों को मिलता रहेगा ? 

दूसरा है - आपका परिवार का फ़ाइनेंशियल सिक्योरिटी 

हम भारतीयों की जिंदगी बड़ी ही मौज मस्ती के साथ त्योहारों के बीच कटता है. लेकिन छोटी सी आपदा भी हमें परेशान कर जाता है. हम भगवान भरोसे सड़क पर आ जाते हैं. अच्छा खासा परिवार बिखर जाता है. 

आपको परिवार का मुखिया इसलिए कहा जाता है कि आप इस परिवार के लिए आय के स्रोत हैं. क्या आप के असमय मृत्यु के पश्चात आपके घर का आय का स्रोत क्या रहेगा ? इसीलिए कहा जाता है कि हमें टर्म प्लान जरूर खरीदना चाहिए . 

देश ने इमरजेंसी एवं नोटबंदी जैसे दौड़ भी देखे हैं. पहले के समय जब राजाओं का हमला होता था तुम लोग घर के अंदर सोना दबा देते थे. घर जलने के पश्चात भी उनका सोना सुरक्षित रह जाता था. बचे हुए परिवार के सदस्य उसका उपयोग करके नई जिंदगी शुरू कर लेते थे. 

मेरा प्रश्न है कि ऐसी स्थिति में आपका परिवार के लिए क्या बचेगा ? कुछ इस तरह का इन्वेस्ट ज़रूर करें. शेयर मार्केट, म्यूच्यूअल फंड एवं बैंक में जमा रुपया भी आपको कभी अनिश्चित घेरे में खड़ा कर सकता है. 

इनकम टैक्स या बिजनेस टैक्स की बचत कैसे की जाए. इस संदर्भ में भी काम करने की आवश्यकता होती है. जिसके लिए आप समय-समय पर एडवाइजर की राय लेते रहें. 

तीसरा - मूवेबल व इमूवेबल प्रॉपर्टी की पकड़ को अच्छी रखें

आपके पास जो भी धन है आपको देखना होगा कि वह लिक्विड फॉर्म में है या सॉलिड फॉर में है. 

अर्थशास्त्र की भाषा में लिक्विड और उसे कहा जाता है जो आपके कैश के फॉर्म में बैंकों में जमा होते हैं या आपके घर पर होते हैं. जिसे आप किसी भी समय प्रयोग कर सकते हैं. इस तरह के प्रॉपर्टी को मूवेबल प्रॉपर्टी भी कहा जाता है. 

कुछ ऐसे भी प्रॉपर्टी होते हैं जिससे आप तुरंत बेचकर रुपया हासिल नहीं कर सकते हैं. जैसे आपका जमीन या घर है उसे अर्थशास्त्र के लोग इमूवेबल प्रॉपर्टी के फॉर्म में रखते हैं.

Corporate / Company Finance in Hindi

कॉरपोरेट फाइनेन्स को हिंदी भाषा में निगम वित्त कहते हैं. जो बड़े कंपनियों के फंडिंग एवं पूंजी संरचना से संबंधित व्यापक प्रबंधन करने का काम करता है. कॉरपोरेट फाइनेंस, वित्त का विभाजन है जो वित्तपोषण, पूंजी संरचना और निवेश संबंधित कार्यों के लिए होता है. 

कॉर्पोरेट वित्त मुख्य कार्य शेयरधारकों के शेयर का मूल्य बढ़ाना है जिसके लिए लोंग टर्म एवं शॉर्ट टर्म प्लानिंग करना शामिल है. कॉर्पोरेट फाइनेंस कार्यक्षेत्र कैपिटल इन्वेस्टमेंट के निर्णय से लेकर बैंकिंग इन्वेस्टमेंट तक होता है. 

Public Finance in Hindi

पब्लिक फाइनेन्स को हिंदी में सार्वजनिक वित्त या लोक वित्त कहते हैं जो सरकार के आय व खर्च का आकलन के साथ प्रबंधन करने का कार्य करता है.

सार्वजनिक वित्त में सरकार के अर्थव्यवस्था का अध्ययन होता है. अर्थशास्त्र का वह शाखा है जिसमें राजस्व और सरकारी खर्च का आकलन होता है. अर्थव्यवस्था का अच्छे और बुरे परिणामों का आकलन होता है. इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए योजना तैयार करना मुख्य उद्देश्य होता है. 

अर्थशास्त्र के अनुसार बिजनेस क्या है

बिजनेस शब्द का ओरिजिन इंग्लिश भाषा के Bisignis से हुआ है. जिसका मतलब ''खरीदने की अवस्था'' है. अगर आप हिंदी अंग्रेजी डिक्शनरी को पलट कर देखेंगे तो आपको धंधा, कारोबार या उद्द्य्म जैसे शब्द मिलेंगे. 

बिजनेस की परिभाषा - यह वह संस्था या आर्थिक प्रणाली है जो अपने उत्पाद एवं सेवाओं का निर्माण करते हैं और फायदा के लिए अपने ग्राहकों को बेच देते हैं. इसे बिज़नेस कहा जाता है. 

उदाहरण के तौर पर देखें तो, रिलायंस जिओ अपने ग्राहकों के लिए मोबाइल नेटवर्क जैसे सेवा का निर्माण करता है. फायदा कमाने के लिए अपने ग्राहकों को बेच देता है. इस तरह से रिलायंस जिओ बिजनेस कर रहा है. जो अपने ग्राहकों के आवश्यकताओं को धन के प्राप्ति के बदले पूरा करता है. 

लोकतांत्रिक देशों में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था होता है. ज्यादातर बिजनेस निजी हाथों में होता है. उपभोक्ता ज्यादातर उत्पाद एवं सेवाओं को निजी कंपनी से खरीदता है. 

निजी कंपनी को जो बिजनेस से फायदा होता है उससे वह सरकार को टैक्स देता है. यही नहीं सेवा एवं वस्तु खरीदने वाले उपभोक्ता भी सरकार को जीएसटी के तहत टैक्स देते हैं. 

व्यापार की परिभाषा क्या है

व्यापार को अंग्रेजी भाषा में ट्रेड कहते हैं जबकि कुछ लोग उसे तेजारत के नाम से भी जानते हैं. अर्थशास्त्र के अनुसार व्यापार को इस प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है. 

" अर्थव्यवस्था की वह प्रणाली है जिसमें कोई व्यक्ति या संस्था निर्माण स्थान या अन्य स्थान से सेवा एवं उत्पादों को खरीदकर दूसरे स्थान पर उपभोक्ताओं को फायदे के लिए भेज देता हो उसे व्यापार की संज्ञा देते हैं. '' 

इस काम को अंजाम देने वाले को अर्थशास्त्र में व्यापारी कहते हैं और खरीदने वाले को उपभोक्ता कहा जाता है. यह क्रिया मुनाफा कमाने के लिए क्या जाता है. याद रखें कि व्यापारी सिर्फ वस्तु या सेवा को खरीदकर एक जगह से दूसरी जगह पर बेचता है और वह इसका कतई निर्माण नहीं करता है. 

बिजनेसमैन और व्यापारी में क्या अंतर होता है

क्या कुछ दुकानदार भाई बोलते हैं कि हम बिजनेसमैन हैं. क्या कहना यह बिल्कुल सही है. अगर दुकानदार भाई, अपने दुकान में बेचे जाने वाली सामग्री या सेवाओं का निर्माण कर के बेचते हैं तो वह बिजनेसमैन एवं व्यापारी दोनों है. 

कोई व्यक्ति या संस्था आर्थिक फायदे के लिए किसी वस्तु या सेवा का निर्माण करता है. और उससे फायदा कमाने के लिए बेच देता हो, उस व्यक्ति को हम बिजनेसमैन का सकते हैं. 

अगर कोई व्यक्ति या संस्था किसी वस्तु या सेवा को खरीदकर अपने ग्राहकों के बीच में मुनाफा के लिए भेज देते हैं बिना निर्माण किए उसे हम लोग व्यापारी कह सकते हैं. 

उदाहरण के तौर पर रिलायंस जिओ मोबाइल नेटवर्क सेवा देने के लिए जिओ सिम का निर्माण करता है इसके मालिक मुकेश अंबानी बिजनेस कर रहे हैं. जबकि एक दुकानदार भाई उसे खरीद कर अपने दुकान पर बेच रहे हैं उसे व्यापारी कहा जा सकता है. 

Finance In Hindi जैसे शब्द से आपने इस लेख को पढ़ना शुरू किया था जिसमें आपको वित्त संबंधित अनेक जानकारी दिया गया है. लेख के आखिरी हिस्से में बिजनेस क्या है और व्यापार से कैसे अलग है यह बताया गया है. इस वेबसाइट पर इससे संबंधित अनेक आर्टिकल हैं. जिसे आप पढ़ कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं.

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