बेनामी संपत्ति क्या होता है ?

बेनामी संपत्ति क्या है ?

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बेनामी संपत्ति‍ के बारे में लोग यह सोचते हैं कि वह संपत्ति जो बिना नाम की होती है ! लेकिन यह सच नहीं है, संपत्ति का रकम चुकाने वाला आदमी दूसरे आदमी के नाम से संपत्ति का पेपर बनवाते हैं या उसके दूसरे आदमी नाम से प्रॉपर्टी खरीदते हैं! यह दूसरा आदमी हो सकता है उसकी पत्नी पुत्र, पुत्री भाई-बहन या अन्य रिश्तेदारों या सहयोगी ! ज्वाइंट प्रॉपर्टी वह भी बेनामी संपत्ति माना जा सकता है जिसमें एक खरीदार ने सारा पैसे का दिया हो, उसमें बाकी हिस्सेदार का वैध स्रोत का इतना इनकम ना हो ! कुछ लोग अपने काले धन को छुपाने के लिए अपने रिश्तेदार या नौकरों के नाम से संपत्ति खरीदते हैं जबकि उसके रिश्तेदार या नौकरों की संपत्ति खरीदने  के लिए वैध स्रोत इतना इनकम ना हो! 

बेनामी सौदे करने पर हो सकती है 7 साल तक की कैद भारत सरकार का नया कानून आ गया है ! चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्ति को माना जा सकता है बेनामी संपत्ति !

बेनामी संपत्ति कानून 2016

बेनामी संपत्ति कानून भारत में पहली बार 1988 में पारित हुआ था जिसका 01 नवंबर, 2016 में संशोधन किया गया था, इसलिए लोग इसे बेनामी संपत्ति कानून 2016 नाम से जानते हैं !

बेनामी संपत्ति कानून 2016 क्या है

इस कानून को बनाने का मकसद है बेनामी लेनदेन की रोकथाम करना है जिस में निम्नलिखित प्रावधान है - जब्त जुर्माना और कैद

  • जब्त - बेनामी संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है !
  • जुर्माना - जुर्माने के तौर पर बाजार कीमत के एक चौथाई के बराबर हो सकता है !
  • कैद - दोषी व्यक्ति को सात सालों तक का कैद हो सकता है !

बेनामी संपत्ति कानून लागू होने के बाद से देशभर में अक्टूबर 2017 तक 400 बेनामी संपत्तियों का मामला दर्ज हुआ है जिसमें बिहार के कई बड़े नेता भी शामिल हैं !

 

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