Economics in Hindi

What is Economics in Hindi | Economics in Hindi, अर्थशास्त्र के जनक व अर्थशास्त्र नोट्स

अर्थशास्त्र ज्ञान की आवश्यकता, आज के समय लगभग सभी ज्ञान प्रेमी महसूस कर रहे हैं ! धन को अपने तरफ आकर्षित करके हर इंसान अमीर बनने की तमन्ना रखता है !

What is Economics in Hindi & Economics in Hindi शब्दों के प्रयोग से आप अर्थशास्त्र को जानना चाहते हैं और इस लेख को अर्थशास्त्र नोट्स के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं ! कृपया इस लेख को अंत तक पढ़े !

अर्थशास्त्र की ज्ञान की आवश्यकता किसको है ?

क्या धन के अध्ययन से, धन को अपने तरफ आकर्षित किया जा सकता है ! जी हाँ, अगर आपको अर्थशास्त्र के ज्ञान को उपयोग करते हैं तो वाकई आप को इसका फायदा हो सकता है ! चाहे आप विद्यार्थी हो या बिजनेस मैन या आम आदमी को इसका फायदा हो सकता है !

What is Economics in Hindi

Economics क्या है या अर्थशास्त्र क्या है, अगर आसान शब्दों में कहा जाए तो इसे ‘’ धन का अध्ययन’’ को अर्थशास्त्र कहा जाता है ! अर्थशास्त्र शब्द का उदय संस्कृत भाषा से हुआ है जो दो शब्दों के मेल से बना है! अर्थ + शास्त्र = अर्थशास्त्र, अर्थ का मतलब धन होता है जबकि शास्त्र का मतलब क्रमबद्ध ज्ञान यानि अध्ययन होता है !

अर्थशास्त्र का परिभाषा आसान शब्दों में इस तरह कहा जा सकता है - सामाजिक विज्ञान का एक शाखा है, जिसमें वस्तुओंसेवाओं के उत्पादन से लेकर विनिमय, वितरण एवं उपभोग का अध्ययन को अर्थ-शास्त्र कहते हैं ! वस्तु और सेवा को समझे बिना अर्थशास्त्र की ज्ञान को अधूरा माना जाता है !

वस्तु और सेवा - अर्थशास्त्र

अर्थशास्त्र में वस्तु को माल भी कहा जाता है, जो इंसान की जरूरत को पूरा करता है और इसे बेचने पर धन की प्राप्ति होती है ! अर्थशास्त्र में उत्पाद जैसे खाने का सामान को वस्तु माना गया है जबकि हवा को वस्तु नहीं माना जाता है ! क्योंकि हवा को ना तो खरीदा और बेचा जा सकता है जबकि मनुष्य की जरूरत को पूरा करता है ! अगर किसी भी पद्धति से हवा को खरीदा और बेचा जाए तो हवा भी अर्थशास्त्र में वस्तु कहा जा सकता है !

अर्थशास्त्र में सेवा, सर्विस भी कहा जाता है, कोई भी मनुष्य या संस्था किसी दूसरे को कोई भी सेवा उपलब्ध करा कर उस से धन की प्राप्ति करता है तो उसे सेवा कहते हैं ! जैसे Airtel आपको नेटवर्क का सेवा प्रदान करता है और उसके बदले आप से धन की प्राप्ति करता है !

विनिमय का मतलब है - किसी भी वस्तु एवं सेवा को खरीदने में हम जो धन देते (क्रय विनिमय) हैं या किसी भी वस्तु या सेवा को बेचने पर हमें जो धन की प्राप्ति (विक्रय विनिमयहोती है उसे विनिमय कहते हैं !

वितरण का अर्थ होता है - किसी भी वस्तुओं एवं सेवाओं को ज्यादा मुनाफे के लिए लोगों के बीच में बांटना, उसे अर्थव्यवस्था में वितरण कहा जाता है !

उपभोग का अर्थ होता है - जिसमें कोई भी उपभोक्ता अपने संतुष्टि के लिए वस्तुआे आैर सेवाआें उपयोग करता है और उसके बदले वह धन चुकाता है उस क्रिया को उपभोग कहा जाता है!

अर्थशास्त्र के जनक

अर्थशास्त्र के जनक के तौर पर दुनिया में सबसे ज्यादा एडम स्मिथ प्रसिद्ध है ! एडम स्मिथ को अर्थशास्त्र का पिता भी कहते हैं ! लेकिन अर्थशास्त्र का जन्म भारत में 2,300 वर्ष पूर्व में हुआ था ! अर्थशास्त्र के प्रथम पुस्तक का नाम कौटिल्य है जो आचार्य कौटिल्य के द्वारा रचित है ! आचार्य कौटिल्य चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे और उसका प्रसिद्ध नाम चाणक्य है !

एडम स्मिथ ने अर्थशास्त्र को धन का विज्ञान माना था जबकि चाणक्य ने पृथ्वी को प्राप्त करने एवं उसकी रक्षा करने के उपायों के अध्ययन को अर्थशास्त्र माना था !

एडम स्मिथ का जन्म 5 जून 1723 में हुआ था, वे महान स्कॉटिश अर्थशास्त्री थे ! प्रमुख रचनाएं -

  • थिअरी ऑफ मोरल सेंटिमेन्ट्स
  • ऐन इन्क्वायरी इन्टू द नेचर ऐण्ड काजेज ऑफ द वेल्थ ऑफ नेशन्स

भारत के सबसे प्रसिद्ध 10 अर्थशास्त्री

  1. दादाभाई नौरोजी
  2. महादेव गोविंद रानाडे
  3. रमेशचंद्र दत्त
  4. महात्मा गांधी
  5. गोपाल कृष्ण गोखले
  6. विश्वेश्वरैया
  7. बाबा साहेब अम्बेडकर
  8. मनमोहन सिंह
  9. अमर्त्य सेन
  10. नरेन्द्र जाधव

अर्थशास्त्र के प्रकार

रेगनर फ्र्रिश ने 1933 में अर्थशास्त्र दो भागों में विभाजित किया था -

  • व्यष्टि अर्थशास्त्र - Micro Economics
  • समष्टि अर्थशास्त्र - Macro Economics

Difference between Micro Economics and Macro Economics in Hindi

व्यष्टि अर्थशास्त्र (Micro Economics) - ग्रीक उपसर्ग Micro का अर्थ "छोटे" से है जिसमें व्यक्तियों और कंपनियों के बीच के संसाधनों के आवंटन और व्यवहार का अध्ययन होता है ! इस अर्थशास्त्र में सीमांत विश्लेषण ज्यादा होता है जो एकल कारकों और व्यक्तिगत निर्णयों के प्रभाव से संबंधित अर्थशास्त्र को व्यष्टि अर्थशास्त्र कहते हैं !

उदाहरण के तौर पर, जैसे -

  • व्यक्ति
  • परिवार
  • फर्म
  • उद्योग
  • विशेष वस्तु का मूल्य
  • मजदूरियों
  • आयों
  • वैयक्तिक उद्योगों, आदि

समष्टि अर्थशास्त्र (Macro Economics) - ग्रीक उपसर्ग Macro का अर्थ ‘’ बड़ा’’ से है जिसमें संपूर्ण अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन, संरचना, व्यवहार और निर्णय लेने से संबंधित है। इसमें क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था शामिल हैं !

उदाहरण के तौर पर, जैसे -

  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार
  • विदेशी विनिमय
  • राजस्व
  • बैकिंग
  • व्यापार चक्र
  • राष्ट्रीय आय
  • रोजगार के सिद्धांत,
  • आर्थिक नियोजन
  • ब्याज दर
  • राष्ट्रीय उत्पादकता
  • आर्थिक विकास, आदि ।

कुछ नए अर्थशास्त्र के शाखाएं

  • पूंजी का अर्थशास्त्र
  • पूँजी निर्माण
  • श्रम अर्थशास्त्र
  • यातायात का अर्थशास्त्र
  • मौद्रिक अर्थशास्त्र
  • केंसीय अर्थशास्त्र
  • अल्प विकसित देशों का अर्थशास्त्र
  • विकास का अर्थशास्त्र
  • तुलनात्म्क अर्थशास्त्र
  • अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र आदि।

Economic Systems in Hindi

Economic Systems को हिंदी में आर्थिक प्रणाली कहते हैं, दुनिया के हर दिन अलग-अलग तरह के आर्थिक प्रणाली को अपनाते हैं ! इस देश के नागरिक आर्थिक प्रणाली के अनुसार विभिन्न व्यवसायों में काम करके लोग अपनी जीविका चलाते हैं ! आर्थिक प्रणालियों को मुख्यतः तीन प्रणालियों में बांटा गया है -

  1. पूंजीवादी अर्थव्यवस्था (Capitalistic Economy)
  2. समाजवादी अर्थव्यवस्था (Socialistic Economy)
  3. मिश्रित अर्थ व्यवस्था (Mixed Economy)

पूंजीवाद (Capitalism Economy) उस आर्थिक प्रणाली या तंत्र को कहते हैं जिसमें उत्पादन के साधन पर निजी हाथों में स्वामित्व होता है। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में व्यवस्था एक व्यक्ति या समूह को अपने आर्थिक नियोजन का स्वतंत्र अधिकार प्राप्त हो जाता है, जो अमीरों के लिए अच्छा होता है लेकिन गरीबों के लिए खराब माना जाता है !

समाजवादी अर्थव्यवस्था (Socialistic Economy) उस आर्थिक प्रणाली या तंत्र को कहते हैं जिसमें उत्पादन के साधन पर समाज का नियन्त्रण होता है! सरकारों और सरकार द्वारा नियुक्त योजना समितियों के द्वारा अर्थव्यवस्था के निर्णय लिये जाते हैं।

महात्मा गांधी जी समाजवादी अर्थव्यवस्था को भारतवर्ष में देखना चाहते थे ! गांधी जी पूंजीवादी औद्योगीकरण के विरोध करते थे, वे मानते थे कि आर्थिक असमानता, अमीरों का गरीबों पर शोषण, बेरोज़गारी, राजनीतिक तानाशाही आदि का कारण पूँजीवादी अर्थव्यवस्था है !

मिश्रित अर्थ व्यवस्था (Mixed Economy) उस आर्थिक प्रणाली या तंत्र को कहते हैं जिसमें उत्पादन के साधन पर समाज और निजी हाथों में स्वामित्व होता है ! सार्वजनिक स्वामित्व तथा निजी स्वामित्व का मिश्रण को भारत में देख सकते हैं ! समाजवाद और पूंजीवाद का मिश्रण को ही मिश्रित अर्थ व्यवस्था कहते हैं !

दुनिया के कई बड़े अर्थशास्त्री मानते हैं कि समाजवाद और पूंजीवाद का मिश्रण वास्तव में मुमकिन नहीं है !

अर्थ व्यवस्था का उद्देश्य

Economics in Hindi को और बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं तो इस उदाहरण को बड़े ध्यान से पढ़िए ! आर्थिक जगत के विभिन्न एजेंटों व इकाइयों का उद्देश्य अलग-अलग होते हैं लेकिन एक बात कॉमन है ! धन का प्रवाह अपनी तरफ करने और इकट्ठा करके, अपने आप को ज्यादा बेहतर बनाने की प्रतिस्पर्धा हमेशा लगा रहता है !

सरकार

सरकार, उपभोक्ताओं के द्वारा निर्वाचित जन-प्रतिनिधि होता है जो अपने जनता को कुछ सेवाएं फ्री देता है लेकिन उसके बदले टेक्स्ट के रूप में काफी पैसे वसूल करता है ! दुनिया के हर देश के सरकार अपने जनता से पैसा कमाना चाहती है और उस पैसे का उपयोग समाज के सबसे कमजोर लोगों को बीच में करना पसंद करता है !

लोकतांत्रिक देशों में ज्यादा टैक्स वसूली कर के सरकारी खज़ाने को भरा जाता है! सरकारी खज़ाने के धन को समाज के निम्न वर्ग के लोगों के विकास पर खर्च करती है ताकि वह निम्न वर्ग भी उच्च वर्ग में बदल जाए ! सरकार का अर्थव्यवस्था समाज के उच्च वर्ग पर ही निर्भर करता है !

मालिक / उद्योगपति

उद्योगपति अपने वस्तु एवं सेवा की लागत को कम करना चाहते हैं ! उसके लिए मशीनों का ज्यादा उपयोग एवं सस्ता नौकर को काम पर लगाते हैं ताकि मुनाफा ज्यादा हो ! इसमें लोकतांत्रिक सरकार भी उद्योगपतियों को मदद करता है ताकि मुनाफे ज्यादा होने से उसे ज्यादा टैक्स मिले !

जबकि सरकार का हमेशा कहना होता है कि उद्योग लगने से लोगों को नौकरी मिलती है जबकि सच्चाई यह भी है कि सरकार को उससे इनकम टैक्स एवं अन्य टेक्स भी प्राप्त होता है ! उद्योग से फायदा सबसे ज्यादा उसके मालिक को होता है उसके बाद सरकार को और सब से कम वहां पर काम करने वाले को, लेकिन फायदा तीनों को होता है !

उपभोक्ता

जब उपभोक्ता कोई सेवा एवं वस्तु को मार्केट से लेना चाहता है तो उसके पास कई ऑफर होते हैं ! उपभोक्ताओं के पास फैसला लेने की बेबसी होती है क्योंकि उसे अर्थशास्त्र को इतना ज्ञान नहीं होता जितना की सेवा या वस्तु को जो मार्केट में बेचते हैं !

उपभोक्ता कम से कम धन को खर्च कर के सेवा या उत्पाद खरीदना चाहता है जबकि सेवा या उत्पाद बेचने वाले अपने उपभोक्ताओं को लंबे समय तक अपना ग्राहक बना कर रखना पसंद करता है ! सेवा देने वाले धीरे-धीरे उससे धन निकालना पसंद करते हैं जबकि उत्पाद बेचने वाले हैं एक साथ सारे धन की उगाही करता है !

अर्थव्यवस्था के ज्ञान से सब को फायदा होता है

What is economics in hindi, समझना चाहते हैं तो आपको एक और उदाहरण देना चाहता हूं ! मोदी सरकार का जनधन अकाउंट यह एक बहुत अच्छा उदाहरण है इस को बारीकी से समझिए !

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का रुपया घर के किसी कोने में पड़ा होता था! मोदी सरकार ने एक ऐसा योजना लाया जिसमें सभी ग्रामीण भारतीयों का अकाउंट खोला गया ! ग्रामीणों ने काफी पैसे को बैंक अकाउंट में डाल दिया !

ग्रामीणों को फायदा

  • लगभग 4% का ब्याज दर मिलना शुरू हो गया जो कि उसे घर पर रखने पर नहीं मिल रहा था.
  • उसका रुपया पहले से ज्यादा सुरक्षित हो गया.
  • ग्रामीणों के लिए ज्यादा लोन की राशि उपलब्ध हो गया.

बैंक को फायदा

बैंक अपने ग्राहक को 4 परसेंट ब्याज दे रही होती है, तो इसका मतलब यह हुआ कि वह लोन की राशि जब किसी दूसरे ग्राहक को देता है उस से 16 से 18% का ब्याज दर वसूल करता है ! यानी कि बैंकों को 12 से 14% का मुनाफा होना शुरू हो गया !

सरकार को फायदा

बैंक या पब्लिक अमीर होता है तो इसका मतलब यह हुआ कि सरकार भी अमीर हो रहा है उसे पहले से ज्यादा टैक्स मिलेगा !

दोस्तों इकोनॉमिक्स का ज्ञान यही है कि बेजान रुपयों (घर पर रखा रुपया) मोदी सरकार ने जान डाल दिया अब वह रुपया और रुपया कमा रहा है! जिसमें पब्लिक एवं बैंक के साथ सरकार का भी विकास हो रहा है !

 

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