बीमारी और इलाज - आयुर्वेद इलाज , होम्योपैथिक इलाज व देसी इलाज

By: Abuzar Niyazi Last Edited: 04 Mar 2019 02:41 AM

बीमारी और इलाज - आयुर्वेद इलाज , होम्योपैथिक इलाज व देसी इलाज! इलाज के बारे में एक बेहद जरुरी जानकारी

बीमारी और इलाज - इलाज शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में अंग्रेजी इलाज के विकल्प के अलावा आयुर्वेद इलाज, होम्योपैथिक इलाज व देसी इलाज आता है, जानिए विस्तार से इलाज के बारे में ! 

बीमारी क्या होता है ?

बिमारी को रोग या डिजीज कहते हैं आम भाषा में यह कह सकते हैं कि स्वास्थ्य की ख़राब है, जब मनुष्य, शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक रुप से पूर्ण स्वस्थ ना हो उसे बीमारी कहते हैं और उस मनुष्य को बिमार माना जाता है !

बीमारी की परिभाषा - जब मनुष्य शारीरिक, मानसिक व सामाजिक तौर पर पूरी तरह स्वस्थ ना होना, उसे बीमारी कहा जाता है !

स्वस्थ की परिभाषा -

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्वास्थ्य सिर्फ बीमारी या दुर्बलता का नहीं होना बल्कि पूर्ण रूप से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तौर पर सक्षम होना को स्वास्थ्य कहते हैं !

या

दैहिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ होना (समस्या-विहीन होना)!

स्वास्थ्य की समग्र परिभाषा यह भी हो सकती है - जब हम स्वास्थ्य की सभी प्रकार को इस परिभाषा में शामिल करें जैसे 

  • शारीरिक स्वास्थ्य
  • मानसिक स्वास्थ्य
  • बौद्धिक स्वास्थ्य
  • आध्यात्मिक स्वास्थ्य
  • सामाजिक स्वास्थ्य

बीमारी और स्वास्थ्य की परिभाषाओं यह कह सकते हैं कि दोनों विपरीत शब्द है, आरोग्य और स्वस्थ होना बिना स्वास्थ्य की जानकारी का असंभव है !

आप हर दिन जो कुछ भी करते हैं अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए करते हैं, कल्पना कीजिए कि आप दुनिया में नहीं है तो सब कुछ किया हुआ आप का बेकार है !

लंबे एवं रोगमुक्त जिंदगी के लिए अपनी जिंदगी से कुछ समय मांग लिजिए और वह समय स्वास्थ्य जानकारी के नाम पर सुपुर्द कर दें !

बीमारी के लक्षण क्या होता है ?

जब मनुष्य का शरीर का कोई भी हिस्सा पूर्ण रूप से काम नहीं करता है, मनुष्य का शरीर का असामान्य कार्य करने लगता है उसका असामान्य कार्यों को लक्षण कहते हैं !

बीमारी के संकेत क्या होता है ?

जब मनुष्य का शरीर का कोई हिस्सा पूर्ण रूप से काम नहीं करता है मनुष्य के शरीर में असामान्य संकेत पैदा करती है जैसे चमरे का रंग बदलना, आंखों का पीला होना आदि को बीमारी संकेत कहते हैं !

बीमारी के लक्षणों और बीमारी के संकेतों से आप अपनी जिंदगी को जोखिम में जाने से बचा सकते हैं !

अगर आपको यह पता हो कि यह लक्षण और यह संकेत इन बीमारी के हैं और वह बीमारी कितना खतरनाक है ! बीमारी से होने वाले और स्वास्थ की समस्या के अलावा आप हॉस्पिटल के खर्चे को भी कम कर सकते हैं !

बीमारियों के प्रकार - रोग के प्रकार

बीमारियों के बहुत सारे प्रकार होते हैं प्रमुख बीमारियों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है जैसे जन्मजात एवं अर्जित बीमारियां !

जन्मजात रोग

जन्मजात रोग उसे कहा जाता है जो नवजात शिशु को जन्म के समय से ही हो जैसे 5 से ज्यादा अंगुलियों की संख्या इस प्रकार के बीमारी को जन्मजात रोग कहा जाता है यह रोग मां के पेट में गर्भ में पल रहे बच्चे में संक्रमण या जनेटिक कारणों से हो सकता है !

अर्जित रोग

अर्जित रोग वैसे लोगों को कहा जाता है जो जन्म के समय से मौजूद ना हो जो अन्य कारणों की वजह से रोग उत्पन्न हुआ हो उसे वर्जित रोक कर सकते हैं ! अर्जित रोगों को भी दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है जैसे संक्रमक रोग और गैर संक्रामक रोग !

संक्रामक रोग

संक्रामक रोग को संचायी बीमारी भी कहते हैं यह रोग होने के पीछे रोगजनक सूक्ष्मजीव होते हैं जैसे वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, कवक व कीड़ों आदि , यह रोग को घातक इसलिए माना जाता है कि एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे असंक्रमित व्यक्ति तक आसानी से पहुंच जाता है !

गैर–संक्रामक रोग

गैर–संक्रामक रोग को गैर–संचारी और अपक्षयी रोग नामों से भी जाना जाता है ! गैर संक्रामक रोग उसे माना जाता है जिसमें मनुष्य शरीर का अंग प्रणाली सही तरीके से काम ना कर रहा हो इनकी वजह चाहे पोषक तत्वों की कमी हो या विटामिनों की कमी या एक्सीडेंट भी हो सकता है !

बीमारियों के लक्षण - बीमारियों के संकेत

इन लक्षणों और संकेतों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बीमारी जानलेवा तो नहीं है या हमें डॉक्टर को दिखाना चाहिए! हर बीमारी के कई लक्षण होते हैं पर यहां पर मुख्य लक्षणों का विवरण है!

डेंगू बीमारी के लक्षण

यह रोग अचानक तीव्र ज्वर यानी बुखार के साथ शुरू होता है जिसमें भूख ना लगना लक्षणों के साथ दर्द और थकान देखा जा सकता है ! डेंगू के मरीजों में साधारणता यह देखा जाता है कि प्लेटलेट्स काउंट कम हो जाता है जिसको आप स्थानीय लेब से भी चेक करवा सकते हैं !

पोलियो बीमारी के लक्षण

मांसपेशियों के संकुचन में अवरोध तथा हाथ-पैर में लकवा

हार्पीज बीमारी के लक्षण

त्वचा, श्लष्मकला त्वचा में जलन, बेचैनी, शरीर पर फोड़े, यह शुरुआती दिनों का लक्षण है बाद में रोगी शारीरिक रूप से विकलांग हो सकता है !

इन्सेफलाइटिस बीमारी के लक्षण

बुखार, बेचैनी, दृष्टि दोष, अनिद्रा, बेहोशी व सांस लेने में परेशानी और यह एक घातक रोग है !

कैंसर बीमारी के लक्षण

शरीर में असमान्य गांठ बनना, कमजोरी आना, गांठ में पस बनना, और सम्माननीय फीवर होना!

गाउट बीमारी के लक्षण

पाँव के जोड़ों में यूरिक एसिड का जमा होना, जोड़ों का फुल नाम उसमें दर्द होना और जोड़ों चलने पर ज्यादा दर्द होना !

हीमोफीलिया बीमारी के लक्षण

साधारण कट होने पर खून का बहाव ना रुकना, यह बीमारी मर्दों में देखी जाती है और शरीर से बाहर आए खून का थक्का ना बनना !

हेपेटाइटिस बीमारी के लक्षण

यकृत इंफेक्शन से होता है, मलद्वार से खून आना, स्किन का पीला होना, खाना ना पचना पाना, उल्टी और दस्त !

हैजा बीमारी के लक्षण

उल्टी व दस्त, शरीर में ऐंठन, थकान और एनर्जी की भारी कमी !

टिटेनस बीमारी के लक्षण

मांसपेशियों में संकुचन, शरीर का बेडौल होना एवं शरीर का कड़ा होना

कुकुरखांसी बीमारी के लक्षण

बार-बार खांसी का आना, खांसी का बंद न होना और खांसी के बाद भी सूखा बलगम का आना !

न्यूमोनिया बीमारी के लक्षण

छाती में दर्द, सांस लेने में परेशानी और बच्चों में होने के चांस ज्यादा होता है !

प्लूरिसी बीमारी के लक्षण

छाती में दर्द, बुखार, व सांस लेने में परेशानी

प्लेग बीमारी के लक्षण

शरीर में दर्द एवं तेज बुखार, आँखों का लाल होना व गिल्टी का निकलना

डिप्थीरिया बीमारी के लक्षण

गलशोथ, सांस लेने में दिक्कत व चलने फिरने से सांस फूलना

कोढ़ बीमारी के लक्षण

अंगुलियों का कट-कट कर गिरना, शरीर पर दाग व चमड़े का असामान्य दिखना शामिल है!

ब्रोंकाइटिस बीमारी के लक्षण

छाती में दर्द, सांस लेने में परेशानी और छोटे सांसो के साथ बार-बार सांस लेना !

टाइफायड बीमारी के लक्षण

बुखार का तीव्र गति से चढऩा, पेट में दिक्कत और बदहजमी के साथ उल्टी होना !

टी. बी. बीमारी के लक्षण

खांसी, बुखार, छाती में दर्द, मुँह से रक्त आना और कमजोरी

सुजाक बीमारी के लक्षण

पेनिस या योनी में शोथ एवं घाव, मूत्र त्याग में परेशानी

मेनिनजाइटिस बीमारी के लक्षण

सरदर्द, बुखार, उल्टी एवं बेहोशी होना और उसके गर्दन को घुमाने में दर्द होना  

इंफ्लूएंजा फिफर्स बीमारी के लक्षण

नाक से पानी आना, सिरदर्द, आँखों में दर्द व देखने में परेशानी

सिफलिस बीमारी के लक्षण

पेनिस या योनी में शोथ एवं घाव, मूत्र त्याग में परेशानी

ट्रैकोमा बीमारी के लक्षण

सरदर्द, आँख दर्द व आंखों का रंग बदलना

गलसुआ बीमारी के लक्षण

लार ग्रन्थियों में सूजन, अग्न्याशय, अण्डाशय और वृषण में सूजन, बुखार, सिरदर्द और इस बीमारी से बांझपन होने का खतरा रहता है।

राइनाटिस बीमारी के लक्षण

नाक का बंद होना, सरदर्द व बेचैनी

स्कारलेट ज्वर बीमारी के लक्षण

बुखार, कमजोरी व थकान 

फ्लू या एंफ्लूएंजा बीमारी के लक्षण

बुखार, शरीर में पीड़ा, सिरदर्द, जुकाम, खांसी व अनिंद्रा

खसरा बीमारी के लक्षण

बुखार, पीड़ा, पूरे शरीर में खुजली, आँखों में जलन, आँख और नाक से द्रव का बहना व मांसपेशियों में कमजोरी !

चेचक बीमारी के लक्षण

पूरा शरीर विशेष रूप से चेहरा व हाथ-पैर दाने निकलना जिसमें बाद में पस होना, बुखार, पीड़ा, जलन व बेचैनी !

रेबीज या हाइड्रोफोबिया बीमारी के लक्षण

बुखार, शरीर में पीड़ा, पानी से भय, मांसपेशियों तथा श्वसन तंत्र में लकवा, बेहोशी, बेचैनी। यह एक घातक रोग है जो कुत्ता बिल्ली और चूहे के काटने से हो सकता है !

इलाज

आधुनिक भारत में भारतीय विभिन्न चिकित्सा परंपराओं का समर्थन करती है यह सुना असामान्य लगता है ! आज के समय में उपचारों की एक विशाल श्रृंखला है जिसमें से आपको खुद से चुनना पड़ेगा है कि आप अपना इलाज किस पद्धति से कराएंगे ! मौजूदा भारत में इलाज के प्रमुख पद्धतियों के नाम -

  • यूरोपीय चिकित्सा -  एलोपैथी यानी अंग्रेजी दवा
  • आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं योगा
  • यूनानी चिकित्सा
  • होम्योपैथिक चिकित्सा
  • देसी इलाज

भारत का मेडिकल चिकित्सा इतिहास

आयुर्वेदिक चिकित्सा

भारत का सबसे पुराना चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद रहा है जो 2000 अधिक वर्षों से भारत में लोगों का इलाज करता रहा है ! शिक्षा प्रणाली सबसे सस्ता और उसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता है जबकि अमरजनसी सेवाओं के लिए कम उपयुक्त है !

यूनानी चिकित्सा

11 वीं शताब्दी में यूनानी चिकित्सा भारत में प्रवेश हुआ था जो मुगल काल में सबसे प्रसिद्ध चिकित्सा पद्धति था ! कुछ बीमारियों की चिकित्सा के लिए यह पद्धति सबसे बेहतर विकल्प हैं आयुर्वेद की तरह यूनानी चिकित्सा पद्धति भी इमरजेंसी चिकित्सा में कम उपयोगी उपयोगी है !

यूरोपीय चिकित्सा

ब्रिटिश 1600 के दशक की शुरुआत में भारत पहुंचे, ब्रिटिश ने अंग्रेजी चिकित्सा पद्धति को लोगों के बीच में प्रसिद्ध कराया, और यूरोपीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद और यूनानी शिक्षा पद्धति को हाशिए पर ले आए !

यह शिक्षा पद्धति सभी प्रकार के इलाज के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ है लेकिन यह पद्धति बहुत महंगा है और इसके बहुत सारे साइड इफेक्ट्स हैं !

होम्योपैथिक चिकित्सा

1850 के दशक में भारत में हेमोपेथिक चिकित्सा प्रणाली लोगों के बीच में प्रसिद्ध होना शुरू हुआ क्योंकि यह अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले काफी सस्ता था क्योंकि इसमें यूरोप का उपनिवेशवाद नहीं था और हेमोपैथिक चिकित्सा प्रणाली जर्मनी से उत्पन्न हुआ था !

गिने चुने इमरजेंसी चिकित्सा के लिए उपयोग होता है ज्यादातर गैर इमरजेंसी चिकित्सा के लिए होम्योपैथिक चिकित्सा का उपयोग किया जाता है जबकि होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति यूरोपिय चिकित्सा पद्धति से काफी सस्ता है !

देसी इलाज

दुनिया का सबसे पहले चिकित्सा पद्धति भारत में उत्पन्न हुआ था जिसके फलस्वरूप आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को विश्वविख्यात मिली थी !

इसी क्रम में भारतीयों ने अपने घरेलू खान पान के अलावा घर के आस-पास उगने वाले पौधों से इलाज करना शुरू किया जिसमें कई बीमारियों के इलाज होते हुए दिखा और उन्होंने आनेवाले पीढ़ियों को यह बात बताई, आज भी लोग कहते हैं नानी-दादी के नुस्खे, जिसे आज के समय हम लोग देसी इलाज कहते हैं !

छोटे-मोटे बीमारियों का इलाज देसी इलाज से कर सकते हैं लेकिन इन बीमारियों का इलाज करना कभी कभी खतरनाक साबित हो सकता है समय रहते ही डॉक्टरों की सलाह ले !

इलाज के बारे में जानकारी क्यों जरूरी है ?

आज के समय में सबसे ज्यादा अनुसंधान अंग्रेजी दवाओं पर हो रहा है और हमारी सरकारें भी अंग्रेजी दवाओं को ज्यादा तरदर्जी दे रहा है क्योंकि इसमें इमरजेंसी मेडिसिन व सर्जरी के जरिए लोगों के ज्यादा जीवन को रक्षा कर पा रही है बाकी चिकित्सा पद्धतियों में यह कमियां उजागर हो रही है !

आयुर्वेद यूनानी एवं हेमोपैथिक शिक्षा पद्धति भी विशेष बीमारियों के लिए अचूक परिणाम दे रहे हैं जो अंग्रेजी चिकित्सा पद्धति नहीं दे पा रहा है !

इलाज की जानकारियों से ही आप अपने पसंद का शिक्षा पद्धति को चुन सकते हैं जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है, इलाज के बारे में हम भारतीय एक दूसरे से आप-बीती को साझा करते हैं और हर बीमारियों के लिए निचोड़ निकालते हैं कि कौन सा पद्धति हमारे इलाज के लिए बेहतर साबित हो सकता है !