प्रेगनेंसी टेस्ट कब करे

By: Dr. K. K. Jha Last Edited: 04 Mar 2019 02:38 AM

प्रेगनेंसी टेस्ट कब करे

अगर आप का पीरियड मिस्ड हुए एक सप्ताह से ज्यादा हो गया हो और निम्नलिखित लक्ष्मणों को अपने ऊपर महसूस कर रहे हो तो, आप को प्रेगनेंसी टेस्ट कर लेना चाहिए !

  1. स्तनो में सूजन एवं भाड़ीपन
  2. थकान
  3. मासिक धर्म के समान ऐंठन
  4. उल्टी के साथ या इसके बिना मतली
  5. सिर दर्द
  6. कब्ज
  7. मिजाज़ में बदलाव
  8. बेसल शरीर तापमान बढ़ जाना
  9. खाना खाने के पैटर्न में बदलाव
  10. पहले से ज्यादा बार यूरिन
  11. एब्डॉमिनल सूजन

ऊपर लिखे लक्षणों के आधार पर किसी को आप प्रेग्नेंट साबित नहीं कर सकते, प्रेगनेंसी टेस्ट द्वारा ही प्रेगनेंसी को प्रमाणित किया जा सकता है ! दो प्रकार से आप प्रेगनेंसी टेस्ट करवा सकते हैं  -

  1. प्रेगनेंसी टेस्ट किट - घर पर
  2. हॉस्पिटल एवं डायग्नोस्टिक सेंटर से

प्रेगनेंसी टेस्ट किट से घर पर कैसे करें

प्रेगनेंसी टेस्ट किट क्या है

प्रेगनेंसी टेस्ट किट एक छोटा सा यंत्र है जिसका कीमत ₹100 से कम होता है ! जिसके इस्तेमाल करके आप घर बैठे पता कर सकते हैं कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं !

कितने दिनों के बाद करे प्रेगनेंसी टेस्ट

ज्यादातर कंपनियों का दवा होता है कि मिस्ड पीरियड के 3 दिनों के बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट कर सकते हैं ! जबकि देखा जाता है कि 7 दिनों के बाद ही उचित रिजल्ट आता है !

मिस्ड पीरियड का हिसाब कैसे रखें

आपको पता होना चाहिए कि पिछले 3 महीनों का पीरियड का समय 30 दिनों का है या उससे ज्यादा ! अगर पीरियड का समय 30 दिनों का है तो अगले महीने का 1 तारीख को आप कह सकते हैं कि मिस्ड पीरियड है !

अगर अगले महीने के 7 तारीख तक आप को पीरियड नहीं आता है तो आप इस टेस्ट को आजमा सकते हैं !

कीट कैसे काम करता है

प्रेगनेंसी टेस्ट किट आपके मूत्र में मानव कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) नामक हार्मोन का पता लगाने का काम करता है।

यह हार्मोन एक गर्भवती महिला के मूत्र में प्रकट होता है ! अगर एचसीजी नामक हार्मोन मूत्र में पाए जाने की पुष्टि करता है यह किट !

प्रेगनेंसी टेस्ट किट प्रयोग या इस्तेमाल कैसे करें

  1. अच्छे परिणामों के लिए, सुबह का पहले यूरिन के साथ टेस्ट करें !
  2. किट को आमतौर पर रेफ्रिजरेटर में संग्रहीत होते हैं इसलिए, सुनिश्चित करें कि आप परीक्षण किट को कमरे के तापमान के बराबर आने का समय दें !
  3. एक साफ, शुष्क ग्लास या प्लास्टिक के कंटेनर में मूत्र को इकट्ठा करें सुनिश्चित करें कि कंटेनर में कोई डिटर्जेंट अवशेष नहीं होने चाहिए !
  4. किट को एक सपाट एवं समतल सतह पर रखें !
  5. एक ड्रॉपर के साथ थोड़ा मूत्र डालें (किट के साथ प्रदान किया गया) और परिपत्र परीक्षण में सिर्फ दो बूंदें डालनी हैं जो आमतौर पर 'एस' के रूप में चिह्नित की जाती हैं पठन पट्टी पर मूत्र को फैल न दें!
  6. तीन से पांच मिनट तक प्रतीक्षा करें (निर्माता के निर्देशों के आधार पर) और फिर परीक्षा परिणाम पढ़ें। निर्धारित समय से पहले परिणाम पढ़ने या बहुत लंबा इंतजार करने की कोशिश में, दोनों गलत रीडिंग हो सकते हैं।
  7. कुछ नवगठित गर्भावस्था परीक्षण किट (उदाहरण के लिए, क्लियरव्यूव) सीधे मूत्र धारा में आयोजित की जा सकती हैं और आपको कंटेनर में मूत्र एकत्र करने की आवश्यकता नहीं है। ये किट आमतौर पर अधिक महंगे हैं (लगभग ₹ 150) !
प्रेगनेंसी किट का परिणाम
  1. टेस्ट कार्ड पर 'सी' और 'टी' चिह्नित क्षेत्रों को देखें। 'सी' एक नियंत्रण इंगित करता है यह बैंड हमेशा प्रकट होना चाहिए क्योंकि यह तुलना बैंड है। 'टी' परीक्षण नमूना इंगित करता है
  2. यदि केवल एक गुलाबी / बैंगनी बैंड दिखाई देता है, तो इस क्षेत्र में 'सी' चिह्नित है, इसका मतलब है कि परीक्षण गर्भावस्था के लिए नकारात्मक है यानि प्रेगनेंसी नहीं है !
  3. यदि दो गुलाबी / बैंगनी बैंड दिखाई देते हैं, तो एक क्षेत्र में 'सी' चिह्नित किया गया है और दूसरा क्षेत्र 'टी' के रूप में चिह्नित है, इसका मतलब है कि परीक्षण गर्भावस्था के लिए सकारात्मक है यानि प्रेगनेंसी है !
  4. यदि कोई बैंड दिखाई नहीं देता है, तो परीक्षण अमान्य है। 24 घंटे के बाद नये पैक के साथ परीक्षण दोहराएं।
  5. यदि क्षेत्र 'टी' में बनाई गई रेखा फीका है, तो यह एचसीजी हार्मोन के निम्न स्तर के कारण हो सकता है। एक फीका बैंड के मामले में, 24 घंटे के बाद नये पैक के साथ परीक्षण दोहराएं।

नोट - कभी-कभार यह भी देखा जाता है कि टेस्ट नेगेटिव आता है और 1 सप्ताह के बाद पीरियड ना आने पर दोबारा टेस्ट करने पर टेस्ट पॉजिटिव ( प्रेगनेंसी है) भी आ सकता है ! इस किट का टेस्ट गलत भी साबित हो सकता है !

हॉस्पिटल एवं डायग्नोस्टिक सेंटर

हॉस्पिटल एवं डायग्नोस्टिक सेंटर में यूरिन सैंपल के द्वारा प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाता है जो हंड्रेड परसेंट (100%) कन्फर्म माना जाता है, डॉक्टर इसी टेस्ट के अनुसार अपने मरीज का इलाज करते हैं !