कुल्हैया बिरादरी के लोगों में 5 सबसे बड़ी समस्या क्या है

By: M. S. Nashtar Last Edited: 08 Aug 2019 04:03 AM

Kulhaiya Community Peoples Problem

क्या आपने कभी किसी नेता से पूछा है कि "कुल्हैया बिरादरी के लोगों में 5 सबसे बड़ी समस्या क्या है" ? जब तक हम लोग अपनी समस्या को समझेंगे नहीं तब तक उसका निवारण करने लायक बन भी नहीं सकते हैं. 

शिक्षा की सबसे बड़ी समस्या

अपने बिरादरी में कुछ ही संपन्न परिवार हैं जो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल और कॉलेजों में पढ़ा लेते हैं या किसी बड़े शहर में भेज देते हैं. ज्यादातर लोगों को इसी सीमांचल के धरती पर रेंगना पड़ता है. 

हमारी इनकम इतनी भी नहीं है कि सीमांचल में फल फूल रहे नए प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को डाल सकें. मजबूर होकर सरकारी स्कूल या मदरसों में अपने बच्चों को भेजना होता है. 

सरकारी स्कूल की हालत तो जानते ही होंगे लेकिन यहां की समस्या और भी विकराल है. नीतीश कुमार के शासनकाल में नियोजित शिक्षकों का बहाली हुआ था. जिसमें मदरसा से डिग्री धारक को भी स्कूल में सरकारी नौकरी दे दिया गया. 

यह खबर किसी से छुपा हुआ नहीं है कि यहां के सरकारी स्कूलों के कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिसे सिग्नेचर करना नहीं आता है. विद्यालय आज के समय एक योजना केंद्र बनकर रह गया है. 

जहां पर सरकार के तरफ से बहुत सारी योजनाएं विद्यार्थियों के लिए आता है और उसे मिलता भी है. लेकिन शिक्षकों की गुणवत्ता को लेकर अभी भी प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है. 

रोज़गार की भारी कमी है

बिहार के इस क्षेत्र में रोजगार की भारी कमी देखी जा सकती है. इस बिरादरी के ज्यादातर लोग खेती-बाड़ी पर डिपेंडेंट होते हैं. लेकिन खराब पर्यावरण उसका खेल बिगाड़ देता है. खेती कर के दर साल गरीब होते जा रहे हैं. 

जब उस किसान को गरीबी पूरी तरह गिरफ्त में ले लेता है तो उसे काम की तलाश में दिल्ली और पंजाब का रुख करना पड़ता है. रोजगार की तलाश में अपने परिवार से हजारों किलोमीटर दूर चले जाते हैं. 

आपने कभी भी किसी नेतागण को यह बोलते हुए नहीं सुना होगा कि, हम रोजगार उत्पन्न करने के लिए यहां पर कोई फैक्ट्री लगवाने वाले हैं. चुनाव के मौसम में एक ही फैक्टर काम करता है वह है कि कुल्हैया को जिताना है. इस क्रम में नेताजी तो जीत जाते हैं लेकिन आपकी वही पर हार हो जाती है. 

स्वास्थ्य की बड़ी समस्या

खास करके सीमांचल के इस 4 जिलों में अगर आप गांव के क्षेत्र का दौरा करेंगे तो, तभी पता चलेगा प्रखंड स्तर से नीचे जितने भी सरकारी अस्पताल हैं उसके बिल्डिंग जर्जर बन चुके हैं. 

किसी किसी पंचायत में हॉस्पिटल की बिल्डिंग तो बन गया लेकिन वहां पर डॉक्टर कभी भी नहीं आया है. स्वास्थ्य की समस्याओं को लेकर सबसे बड़ी कठिनाई महिलाओं को होती है. 

आयरन युक्त पानी पीने को मजबूर

मेडिकल भाषा में कहा जाए तो सीमांचल के इलाके का पानी पीने लायक नहीं है. जिस जमीन का पानी हम लोग हैंडपंप के जरिए निकाल कर पीते हैं वह एक तरह से घातक है. 

नीतीश कुमार ने इस के संदर्भ में शुद्ध पानी की योजना शुरू किया है. कुछ इलाकों में उसका सिस्टम काम भी कर रहा है. लेकिन ज्यादातर इलाकों में अभी भी यह समस्या बरकरार है. 

गरीबी समस्या है लेकिन निदान में हम लोग पीछे हैं

कुल्हैया समाज समाज के लाखों लोग ऐसे मिलेंगे जिसका खेती योग्य जमीन आप नदी में समा चुका है. हर साल सैलाब आता है फसल तो बर्बाद करता ही है उसके साथ मिट्टी के कटाव से खेत को नदी में तब्दील कर देता है. 

महंगाई दर हर साल 11 परसेंट बढ़ जाता है. लेकिन कुल्हैया किसान भाइयों के ज़मीन का कीमत हर साल 11 परसेंट नहीं बढ़ता है. हमारे भाई खेती-बाड़ी में आधुनिक तरीकों को नहीं अपना रहे हैं. 

जिसके कारण हर साल उनका इनकम कम हो रहा है. हमारे समाज में बच्चों की तादाद ज्यादा होती है. उसके मेंटेनेंस में खर्च हर साल बढ़ता है. हर साल हमारी गरीबी को नए मुकाम मिलता है. 

इन पांचों समस्याओं का निदान अगर समय रहते हुए निवारण नहीं किया गया तो यह समाज बहुत बड़ी गरीबी की ओर चला जाएगा. सरकारी डाटा के अनुसार अमौर प्रखंड से सबसे ज्यादा बीपीएल परिवार पूरे बिहार में कहीं पर भी नहीं है. 

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