कुल्हैया बिरादरी का आर्थिक और सामाजिक स्थिति - रिपोर्ट 2019

By: M. S. Nashtar Last Edited: 28 Oct 2019 02:13 AM

कुल्हैया बिरादरी का आर्थिक स्थिति

कुल्हैया बिरादरी का आर्थिक और सामाजिक स्थिति - रिपोर्ट 2019. कुल्हैया बिरादरी का आर्थिक और सामाजिक स्थिति जानने की चाहत रखते हैं ? इस लेख को आप बड़े ही ध्यान से पढ़ सकते हैं. इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए हमारी टीम ने कई महीनों तक मेहनत किया है. 

कुल्हैया कम्युनिटी की आबादी बिहार के अररिया, पूर्णिया और कटिहार व किशनगंज जिले में है. इन 4 जिलों में सबसे ज्यादा आबादी अररिया और पूर्णिया जिले में है. इन 4 जिलों को मिलाकर सीमांचल भी कहा जाता है जो पूर्णिया प्रमंडल के अंतर्गत आता है. 

Economical Status Of Kulhaiya Community

शुरुआत पूर्णिया प्रमंडल से करते हैं. पूर्णिया प्रमंडल में बिहार का 10% से ज्यादा आबादी रहता है. बिहार में सबसे ज्यादा युवाओं का प्रतिशत भी इसी प्रमंडल में है. पूर्णिया प्रमंडल में ज्यादातर आबादी हिंदू आदिवासी एवं मुसलमानों में सुरजापुरी, कुल्हैया और शेख बिरादरी का है. 

कुल्हैया बिरादरी का आर्थिक कैसा है 

कुल्हैया बिरादरी का आर्थिक स्थिति आज के समय में भी बहुत ही दयनीय है. कुछ परिवार हैं जो आर्थिक तौर पर पूरी तरह संपन्न हैं. इस समाज के ज्यादातर लोग खेती-बाड़ी पर निर्भर है या दिल्ली या पंजाब में जाकर काम करते हैं. 

इस समाज में शिक्षा का प्रतिशत बहुत बेहतर नहीं है. जिसके कारण ज्यादातर लोग अभी भी खेती-बाड़ी पर ही निर्भर हैं. समय-समय पर सैलाब इसकी खेती को बर्बाद कर देता है. कभी कभार उसका खेती करने योग्य जमीन भी नदी में कट जाता है. 

अपने समाज के मजदूर वर्ग के आर्थिक स्थिति में सुधार साफ साफ देखी जा सकती है. सरकारी योजनाओं ने उसकी हालत को कुछ हद तक सुधार दिया है.

लेकिन सीमांचल इलाके में उद्योग ना के बराबर है. जिससे यहां के लोगों को काम नहीं मिल पाता है. उसे काम की तलाश में दिल्ली एवं पंजाब जैसे राज्यों का रुख करना पड़ता है. 

नौकरी की भारी कमी है ? इस समाज से जो युवा पढ़ लिख लेते हैं उसे भी अच्छा नौकरी नहीं मिल पाता है. क्योंकि युवाओं का बेसिक एजुकेशन बहुत अच्छा नहीं होता है. अंग्रेजी भाषा का ज्ञान कमजोर होने के कारण उसे प्राइवेट कंपनियों में भी काम कम ही मिल पाता है. 

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कुछ ऐसे भी महावीर है जो आईएएस और आईपीएस बनकर अपने समाज के नाम तो बहुत ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. लेकिन इसकी संख्या बहुत ही कम है. 

इस समाज के ज्यादातर पढ़े-लिखे लोग शिक्षक बनना पसंद करते हैं. क्योंकि उसे लगता है शिक्षक बनने के बाद वह अपने घर के आस पास नौकरी करके अब खेती-बाड़ी का भी काम कर सकते हैं. 

पहले के शिक्षकों को पूर्ण वेतनमान था. जिसके कारण उसके बच्चे बड़े शहरों में भी रहकर शिक्षा हासिल कर लेते थे. अब शिक्षकों को पूर्ण वेतनमान नहीं मिलता है. आने वाले भविष्य में उनके बच्चे बड़े शहरों में रहकर शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो जाएगा. 

कुल्हैया समाज में जॉब प्रोवाइडर की भारी कमी है

इस बिरादरी के कई ऐसे लोग हैं जो दिल्ली के सीलमपुर इलाके में या बेंगलुरु में रहकर अपना स्टार्टअप चलाते हैं. बहुत बड़ी संख्या में वह लोगों को जॉब मुहैया कराते हैं. अगर ऐसे लोग सीमांचल में आकर इस तरह का काम शुरू करते हैं तो यहां के लोगों को काम मिल सकता है. 

हमारे समाज की मानसिकता, जॉब प्रोवाइडर के प्रति ठीक नहीं है. उसे समाज में एक शिक्षक की नजर से भी नहीं देखा जाता है. इसीलिए कम ही युवा ऐसा काम करना पसंद करते हैं. 

समय बदल चुका है, अगर आप सिर्फ सरकार से उम्मीद लगाकर बैठेंगे कि हमें वह नौकरी दे जाएगा. आप की स्थिति में कभी भी सुधार नहीं होगा. 

खेती-बाड़ी को अपना मुख्य काम मानते हैं

अपने समाज की मानसिकता यह है कि हम खेती बाड़ी का काम करें. लेकिन उसमें हम मेहनत कम से कम करना पसंद करते हैं. दूसरी सबसे बड़ी विडंबना यह है हमारे पास 2 एकड़ ज़मीन नहीं होता है और हम लोग अपने आप को किसान मानते हैं. यह कितना उचित है ? 

अगर हमारे पास ज़मीन कम है तो क्या हमें रोज़गार के अन्य विकल्पों पर विचार नहीं करना चाहिए. जिन भाइयों के पास खेती के योग्य पूर्ण जमीन है, आधुनिक खेती के कंसेप्ट को तेजी से नहीं अपना रहे हैं. मक्का की खेती में हमारी आर्थिक स्थिति को थोड़ा सा बेहतर किया है. 

कुल्हैया बिरादरी की सामाजिक स्थिति 

कुल्हैया बिरादरी की सामाजिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं है. रोज़गार व स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था की गंभीर समस्या है. यह समाज़ अमीर और गरीब में विभाजित है. 

ज्यादातर गांव में देखने को मिलेगा कि दो-तीन परिवार अपने आप को अमीर मानते हैं. बाकी लोगों को मजदूर की श्रेणी में रख देते हैं. राजनीति करने वाले समाज को बांटकर उससे फायदा उठाते हैं. 

हमारी वार्ता एक शादी में अररिया जिले के न्यायाधीश से हुआ था. वह न्यायाधीश भाई इस बात से अचंभित थे कि, कुल्हैया समाज के लोग इतने ज्यादा केस में क्यों व्यस्त होते हैं ? एक दूसरे के प्रति इतना नफरत क्यों पालते हैं ? छोटे से आपसी झगड़ों के लिए एक दूसरे पर केस करके, दोनों पार्टी गरीबी के कगार पर खड़े हो जाते हैं. 

आप तो जानते ही होंगे बिहार के सभी जिलों का ज़मीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन हो चुका है. जिसे कोई भी ऑनलाइन चेक कर सकता है किसके नाम से कितना ज़मीन है. 

कुल्हैया बिरादरी के महिलाओं के नाम से 3 फ़ीसदी से भी कम जमीन है.100 कुल्हैया महिला में से सिर्फ 3 के पास भूमि का मालिकाना हक है. अपने समाज में पैदा करने वाले पिता ही महिला को अपनी जगह ज़मीन में हिस्सा नहीं देते हैं. 

कुल्हैया बिरादरी का सबसे अमीर आदमी कौन है

कई भाई मुझे फोन करके पूछते हैं कि " कुल्हैया बिरादरी का सबसे अमीर आदमी कौन है" ? इस प्रश्न का उत्तर बताना बहुत ही मुश्किल है. अपने बिरादरी में इतने भी कोई अमीर लोग नहीं है कि जिसका रैंकिंग फोब्र्स जैसे कोई मैगजीन में आता हों.

सबसे अमीर आदमी अपने बिरादरी का कोई राजनीतिक परिवार ही हो सकता है. लेकिन उसके पास कितने वाइट मनी नहीं है कि उसको सबसे अमीर आदमी कहा जा सके. इस के संदर्भ में आपके पास अगर कोई जानकारी है तो आप हमारी टीम से साझा कर सकते हैं.