Manoranjan Ka Mahatva

About Author: Sunil Kumar

Last Edited: 03 Jun 2019 12:08 AM

मनोरंजन की आवश्यकता

मनोरंजन का महत्व

मनोरंजन का महत्व मनुष्य के जीवन में प्राचीन कालों से रहा है परंतु कुछ मनुष्य मनोरंजन का महत्व ज्यादा देते हैं और कुछ देते ही नहीं है ! दोनों ही आस्थाएं मनुष्य के लिए हानिकारक है!

हमारे समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मनोरंजन को इतना महत्व देते हैं कि वह पूरा समय मनोरंजन में ही बिता देते हैं ! और अपने भविष्य निर्माण के लिए कुछ नहीं कर पाते हैं !

हमारे समाज में कुछ दूसरे लोग ऐसे होते हैं कि जो मनी मशीन बन चुके हैं उसे सिर्फ कमाना आता है अपने लिए समय नहीं है ! मनोरंजन का महत्व इसीलिए समझना जरूरी है !

हमें अपने जिंदगी के गिने चुने समय को विभाजित करने की जरूरत है और हमें समझना पड़ेगा कि यह समय हमारे विश्राम का है तो यह समय हमारे काम करने का है !

तो प्रश्न उठता है कि विश्राम कैसे करें और विश्राम हमारे जिंदगी के लिए क्यों जरूरी है ! जब इंसान काम करता है तो उसमे अपनी उर्जा को खपत कर देता है फिर से उसे काम करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है !

Manoranjan Kee Aavashyakata Kyon hota Hai

विश्राम से उर्जा का संरक्षण होता है जो हम खाते हैं उसका पाचन अच्छे से होता है जिससे हमें ज्यादा उर्जा मिलती है ! मनुष्य का शरीर ऊर्जा का उपयोग विभिन्न मस्तिष्क की क्रियाओं में करता है जिनमें सबसे ज्यादा ऊर्जा का उपयोग तनाव के समय करता है !

हमारे शरीर का सबसे ज्यादा ऊर्जा का खपत मस्तिष्क करता है वह भी तनाव में! तनाव कम करने के लिए अब मनोरंजन का सहारा लेते हैं जिससे हमारा ध्यान बटता है और हम आनंदित महसूस करते हैं !

मनोरंजन की आवश्यकता क्यों है !

मनोरंजन की आवश्यकता आज के भौतिक जीवन में ज्यादा है क्योंकि हमारे जिंदगी में तनाव कुछ ज्यादा ही है, हमें ज्यादा पाने की चाह और दूसरों से आगे पढ़ने की परवाह दिनोंदिन तनाव में धकेल रहा है!

तनाव हमारे मस्तिष्क बहुत ज्यादा काम करने के लिए मजबूर करता है और हमारा मस्तिष्क ज्यादा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है जिससे मनुष्य का शरीर दिनोदिन अंदर से कमजोर होता चला जाता है !

जब मनुष्य के शरीर में ऊर्जा की कमी होती है तो उसे बहुत सारे बीमारी होने के चांसेस बढ़ जाते हैं और उसकी आयु छोटी हो जाती है ! हमें अपनी जिंदगी से तनाव कम करने के लिए मनोरंजन के अच्छे साधन को अपनाना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि हम मनोरंजन में ज्यादा समय तो नहीं दे रहे हैं !

प्राचीन समय में भी मनोरंजन की आवश्यकता होती थी आप ने फिल्मों व कहानियों में जरूर सुना होगा कि राजा शिकार पर जाते थे ऋषि मुनि पहाड़ चट्टानों और पैरों के प्राकृतिक दृश्य को देखकर अपने मन को शांत करते थे !

उस समय भी लोगों में चिंतन एवं सोच होता था जिसके कारण मनुष्य तनाव में आ जाते थे ! उसको कम करने के लिए अनेक प्रकार के त्योहार, मेला देखना आदि को अपनाते थे !

आज के युवा मानते हैं कि मनोरंजन महंगा होना चाहिए! मेरा मानना है कि अगर मनोरंजन महंगा होगा तो उसे पूरा करने के लिए हमें ज्यादा संपत्ति खर्च करना होगा!

उसे अर्जित करने के लिए भी हमें ज्यादा मेहनत करना पड़ेगा अगर हम नहीं कर पाते हैं तो हमें निराशा होती है जिससे फिर तनाव उत्पन्न हो जाता है वह बताएं कि महंगा मनरंजन कैसे मनरंजन हुआ ! याद रखें मनोरंजन के सस्ते साधन को अपनाएं तभी आपका मनोरंजन हो पाएगा!