ग्राम पंचायत अधिकारी के कार्य

ग्राम पंचायत सदस्य के अधिकार

ग्राम पंचायत अधिकारी के कार्य | ग्राम पंचायत सदस्य के अधिकार

ग्राम पंचायत का अधिकारी पंचायत सचिव एवं न्याय मित्र होता है ! ग्राम पंचायत के मुख्य जनप्रतिनिधि मुखिया, उपमुखिया, ग्राम पंचायत सदस्य, समिति, सरपंच व पंच होता है ! ग्राम पंचायत सदस्य के अधिकार विभाजित होते हैं, ताकि एक ग्राम पंचायत सुचारू ढंग से काम कर सके!

ग्राम पंचायत अधिकारी के कार्य

पंचायत सचिव के कार्य -

पंचायत सचिव को पंचायत कार्यालय का प्रभारी कहा जाता है जो पंचायत कार्यालय संबंधित कामों को देखते हैं ! जिनमें सरकारी योजनाओं का लेखा जोखा रखना शामिल है ! पंचायत के जनप्रतिनिधि द्वारा पास किया बजट और उनके कागजात संबंधी कामों को भी पंचायत सचिव देखते हैं !

न्याय मित्र के कार्य

न्याय संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी सरपंच व पंच की होती है परंतु उनकी कागजी कार्रवाई एवं लेखा जोखा का कार्य न्याय मित्र का होता है , जिसे न्याय सहायक के तौर पर देखा जाता है !

ग्राम पंचायत सदस्य के अधिकार  

मुखिया के अधिकार व कार्य

  • ग्राम सभा व ग्राम पंचायत की बैठकों का आयोजित करना और उनकी अध्यक्षता करना।
  • बैठकों का कार्य-व्यवहार संभालना और उनमें अनुशासन बनाए रखना !
  • एक वर्ष समय में ग्राम सभा की कम-से-कम चार बैठकों का आयोजित करना !
  • पूँजी कोष की जिम्मेदारी मुखिया का होता है !
  • ग्राम पंचायत के कार्यकारी का प्रशासनिक अध्यक्ष मुखिया होता है और उसकी देखरेख उनके कार्य क्षेत्र में शामिल है
  • ग्राम पंचायत में कार्यरत कर्मचारियों की देख-रेख से लेकर दिशा निर्देश व नियंत्रण करना मुखिया के कार्य क्षेत्र में शामिल है !
  • ग्राम पंचायत द्वारा पास  की गई कार्ययोजनाओं / प्रस्तावों को लागू करवाना !
  • नियमानुसार रखी गई विभिन्न रजिस्टरों व पंचायत संबंधी कागजात के रख-रखाव का इंतजाम करना।
  • ग्राम पंचायत द्वारा तय किए टैक्सों, चंदों और फीसों की वसूली करवाना !
  • विभिन्न निर्माण कार्यों को कार्यान्वित करने व  लागू करना आदि शामिल है !
  • राज्य सरकार या एक्ट या केंद्र सरकार या किसी अन्य कानून के अनुसार सौंपी गई अन्य जिम्मेदारियों और कार्यों को पूरा करना। केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं को पंचायत के सदस्यों तक पहुंचाना, मुखिया के कार्य क्षेत्र में शामिल है !

उपमुखिया के अधिकार व कार्य

मुखिया की अनुपस्थिति में उपमुखिया का अधिकार व कार्य मुखिया जैसा हो जाता है ! मुखिया के रहे समय, उपमुखिया को लिखित आदेश के रूप में सौपे गए कार्य को उपमुखिया कर सकता है !

पंचायत समिति कार्य व अधिकार

  • अधिनियम के द्वारा सौंपी गई तथा सरकार या जिला पर्षद द्वारा सौंपी गई स्कीमों की वार्षिक योजनाएँ बनाना तथा जिला योजना में सम्मिलित करने हेतु विहित समय के अन्दर में जिला परिषद में प्रस्तुत करना
  • ग्राम पंचायतों की वार्षिक योजनाओं पर समिति पर विचार विमर्श एवं समेकन करना तथा समेकित योजना को जिला परिषद में प्रस्तुत करना
  • पंचायत समिति का वार्षिक बजट बनाना तथा समेकित योजना को जिला परिषद में प्रस्तुत करना।
  • ऐसे कार्यकलापों का सम्पादन एवं ऐसे कार्यों का निष्पादन जो इसे सरकार या जिला परिषद द्वारा सौंपे जाए
  • कृषि (कृषि विस्तार सहित)
  • भूमि सुधार एवं भू-संरक्षण
  • लघु सिंचाई
  • गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
  • पशुपालन, गब्य एवं कुक्कुट
  • मत्स्य उद्योग
  • खादी, ग्राम्य एवं कुटीर उद्योग
  • ग्रामीण आवास
  • पेयजल
  • सामाजिक एवं फार्म वानिकी, लघु वन- उत्पादन, ईंधन एवं चारा
  • सड़क, भवन, पुल, फेरी, जलमार्ग तथा संचार के अन्य साधन
  • गैर-परम्परागत ऊर्जा स्त्रोत
  • शिक्षा, जिसमें प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय भी शामिल हैं
  • तकनीकि प्रशिक्षण एवं व्यवसायिक शिक्षा
  • व्यस्क एवं अनौपचारिक शिक्षा
  • सांस्कृतिक कार्यकलाप
  • बाजार एवं मेला
  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
  • महिलाओं एवं बच्चों का विकास
  • समाज कल्याण (शारीरिक तथा मानसिक रूप से नि:शक्त लोगों का कल्याण)
  • मजोर वर्गों (अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों) का कल्याण
  • सामुदायिक आस्तियों का अनुरक्षण (xxvii) जन वितरण प्रणाली
  • ग्रामीण विद्युतीकरण
  • सहकारिता
  • पुस्तकालय
  • राज्य सरकार द्वारा सौंपे गए ऐसे अन्य कार्य।

ग्राम कचहरी

दाण्डिक अधिकारिता

न्यायपीठ का गठन चार पंच तथा सरपंच सहित कुल पाँच सदस्यों से किया जायेगा। वाद दायर होने के बाद न्यायपीठ सौहाद्रपूर्ण समझौता से वाद का निष्पादन का यथासंभव प्रयास करेगी। सौहाद्रपूर्ण समझौता नहीं होने की स्थिति में न्यायपीठ जांच कर अपना निर्णय देगी।

ग्राम कचहरी को दाण्डिक अधिकारिता के अन्तर्गत भारतीय दण्ड संहिता की धारा- 140, 142, 143, 145, 147, 151, 153, 160, 172, 174, 178, 179, 269, 277, 283, 285, 286, 289, 290, 294(ए), 332, 334, 336, 341, 352, 356, 357, 374, 403, 426, 428, 430, 447, 448, 502, 504, 506 एवं 510 के तहत किये गये अपराधों के लिये केस को सुनने एवं निर्णय देने की अधिकारिता होगी। इन क्रिमिनल धाराओं के सुनवाई के उपरान्त ग्राम कचहरी को एक हजार रुपये तक जुर्माना करने की शक्ति दी गई है। परन्तु ग्राम कचहरी को कारावास की सजा देने का कोई अधिकार नहीं है। source - Bihar Government


Department of Panchayati Raj-BIHAR Website

 

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